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हरिद्वार के मदरसों पर जांच का शिकंजा: 12 हजार छात्र अचानक गायब, डीएम ने गठित की कमेटी

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हरिद्वार के 131 मदरसों में जांच शुरू होते ही 12 हजार छात्र अचानक गायब हो गए। मिड-डे मील के बजट के लिए फर्जी पंजीकरण की आशंका। डीएम ने बनाई चार सदस्यीय जांच कमेटी।

हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में शिक्षा विभाग और प्रशासन की सख्ती के बाद मदरसों में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिले के 131 मदरसों में जांच का शिकंजा कसते ही रिकॉर्ड से अचानक 12 हजार छात्र गायब हो गए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने तक इन मदरसों में कुल 31 हजार छात्र पंजीकृत थे, लेकिन अप्रैल आते-आते यह संख्या घटकर महज 19 हजार रह गई है। आशंका जताई जा रही है कि सरकारी मिड-डे मील (एमडीएम) का बजट और अन्य फंड हड़पने के लिए इन बच्चों का फर्जी पंजीकरण दिखाया गया था।
यह पूरा मामला हाल ही में जिलाधिकारी (डीएम) के निर्देश पर लक्सर तहसील क्षेत्र में हुई औचक जांच के बाद खुलकर सामने आया है। जांच के दौरान 23 मदरसों में भारी अनियमितताएं और कमियां पाई गईं, जिसके बाद विभाग ने उनके मिड-डे मील और अन्य सरकारी फंड पर तुरंत रोक लगा दी है। कार्रवाई के डर से करीब दस मदरसा संचालकों ने अपने संस्थान बंद करने के लिए आवेदन भी दे दिया है। इन मदरसों में छात्र संख्या बेहद कम होने के बावजूद कागजों पर पूरा भुगतान उठाया जा रहा था।
धांधली पकड़ने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) बेसिक अमित कुमार चंद ने रुड़की क्षेत्र के मदरसों के लिए एक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया था। इस ग्रुप में सभी संचालकों को रोजाना मिड-डे मील बनाने और बच्चों के भोजन करने के लाइव फोटो-वीडियो अपलोड करने के निर्देश दिए गए थे। इस कड़े नियम के लागू होते ही 11 मदरसों ने ग्रुप में विवरण साझा करने के बजाय सीधे मिड-डे मील सेवा बंद करने का आवेदन कर दिया, जहां पहले चार हजार बच्चे पंजीकृत दिखाए गए थे।
छात्रों की संख्या में आई इस संदिग्ध और भारी गिरावट को जिला प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। जिलाधिकारी ने शुक्रवार को इस पूरे मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच के लिए उपजिलाधिकारी (SDM) की अध्यक्षता में एक चार सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया है। इस विशेष जांच दल में जिला शिक्षा अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को शामिल किया गया है, जो जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।

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