नई दिल्ली
साहित्यिक संस्था अंतस् की 84वीं कवि संगोष्ठी संपन्न: डॉ. पूनम माटिया और कवियों का दिखा अनोखा अंदाज
साहित्यिक संस्था ‘अंतस्’ की 84वीं आभासी कवि संगोष्ठी में कवियों ने अपनी रचनाओं से समां बांधा। डॉ. पूनम माटिया के संचालन और डॉ. दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में काव्य पाठ संपन्न।
नई दिल्ली। साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था ‘अंतस्’ के तत्वावधान में 84वीं आभासी कवि संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। इस काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता अलीगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दिनेश कुमार शर्मा ने की, जबकि संचालन संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पूनम माटिया ने किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. निशा भार्गव उपस्थित रहीं।
संगोष्ठी की शुरुआत पूजा श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत ‘माँ शारदे! हमें ज्ञान का संसार दे माँ’ सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद सुशीला श्रीवास्तव ने गज़ल की पंक्तियों ‘राहों में लाख ख़ौफ़ के साये लिये हुए’ से समां बांधा। अपर्णा भटनागर, अंशु जैन और पूजा चौहान ‘रवि’ ने विरह, सावन और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित सुंदर काव्य पाठ प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. पूनम माटिया ने सावन के वियोग श्रृंगार पर आधारित भावपूर्ण गीत *’फाल्गुन बीता, बीत गया आषाढ़ कि आया सावन’* और एक गज़ल प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, सोनम यादव, मोनिका शर्मा ‘मासूम’, डॉ. नीलम वर्मा, अपर्णा गर्ग और डॉ. सरिता गर्ग ने भी अपनी सरस रचनाओं से गोष्ठी में उत्साह बनाए रखा।
अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए डॉ. दिनेश कुमार शर्मा ने कहा कि साहित्य सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय की भावना से ओतप्रोत होता है। उन्होंने मोबाइल पर बढ़ती निर्भरता और बदलते सामाजिक मूल्यों पर अपनी कविता प्रस्तुत की। अंत में संस्था के संरक्षक इंजीनियर नरेश माटिया ने सभी सहभागियों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
