अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़
अल्मोड़ा: राज्य आंदोलनकारियों का फूटा गुस्सा, सरकार पर लगाया उपेक्षा का आरोप
अल्मोड़ा के नगरखान में राज्य आंदोलनकारियों की बैठक में सरकार के खिलाफ आक्रोश। पेंशन वृद्धि और लंबित मांगों को लेकर जिलाधिकारी से मिलेगा शिष्टमंडल, आंदोलन की चेतावनी।
अल्मोड़ा। जिले के नगरखान में आयोजित राज्य आंदोलनकारियों की बैठक में शासन और प्रशासन के खिलाफ गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि राज्य निर्माताओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है और उनकी जायज मांगों पर कोई अपेक्षित कार्यवाही नहीं हो रही है। बैठक में सबसे गंभीर मुद्दा मुख्यमंत्री की चार वर्ष पुरानी घोषणा के बावजूद आश्रित विधवाओं के आवेदन शासन को न भेजे जाने का उठा। जिला मुख्यालय में तीन वर्ष से लंबित इन आवेदनों के कारण कई बुजुर्ग महिलाओं की मृत्यु भी हो चुकी है।
आंदोलनकारियों ने राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष में पेंशन में की गई मामूली वृद्धि को “अपमानजनक” करार दिया। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि जहां सरकार लोकतंत्र सेनानियों को 30 हजार रुपये मासिक दे रही है, वहीं राज्य निर्माताओं के लिए केवल साढ़े पांच हजार की घोषणा की गई है। दुखद यह है कि इस घोषणा के दो महीने बीतने के बाद भी अभी तक शासनादेश (GO) जारी नहीं हुआ है, जिससे आंदोलनकारियों में सरकार के प्रति भारी नाराजगी है।
क्षेत्रीय समस्याओं पर चर्चा करते हुए बैठक में ‘सरकार जनता के द्वार’ शिविरों को केवल धन का दुरुपयोग बताया गया। आंदोलनकारियों का कहना है कि इन शिविरों में न तो बड़े अधिकारी पहुंचते हैं और न ही जनप्रतिनिधि, जिससे आम जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। साथ ही, ‘हर घर नल, हर घर जल’ योजना को भी पूरी तरह विफल बताया गया। चनोली ग्राम समूह पेयजल योजना पर करोड़ों खर्च होने के बाद भी ग्रामीणों को तीसरे दिन पानी मिल पा रहा है।
सड़कों की हालत पर तंज कसते हुए वक्ताओं ने कहा कि सरकार की गड्ढा मुक्त सड़कों की घोषणा केवल हाईवे तक सीमित है। ग्रामीण सड़कें आज भी बदहाल हैं और लोक निर्माण विभाग धन की कमी का रोना रो रहा है। बैठक के अंत में निर्णय लिया गया कि एक शिष्टमंडल शीघ्र ही जिलाधिकारी से मिलकर अपनी मांगें रखेगा। यदि फिर भी रवैया नहीं बदला, तो राज्य आंदोलनकारी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। बैठक में ब्रह्मा नन्द डालाकोटी सहित दर्जनों वरिष्ठ आंदोलनकारी उपस्थित रहे।
