हल्द्वानी
बिन्दुखत्ता राजस्व गाँव: विधायक मोहन बिष्ट ने देहरादून में वन सचिव और PCCF से की मुलाकात, कार्रवाई की मांग
लालकुआं विधायक मोहन सिंह बिष्ट ने बिन्दुखत्ता को राजस्व गाँव बनाने और गौला नदी के चैनलाइजेशन को लेकर देहरादून में उच्चाधिकारियों से वार्ता की। जानें पूरी अपडेट।
हल्द्वानी। लालकुआं विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट ने बिन्दुखत्ता को राजस्व गाँव का दर्जा दिलाने और क्षेत्र में भू-कटाव की समस्या को लेकर देहरादून में मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को विधायक ने देहरादून स्थित शासन में सचिव वन और प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (HOFF) से मुलाकात कर बिन्दुखत्ता के लंबित प्रस्तावों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की।
विधायक बिष्ट ने अधिकारियों को याद दिलाया कि मुख्य सचिव ने विगत 25 फरवरी को हुई कैबिनेट बैठक में बिन्दुखत्ता को राजस्व गाँव बनाए जाने का प्रस्ताव लाने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके, अभी तक प्रक्रिया पूर्ण न होने पर विधायक ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने वन विभाग के उच्चाधिकारियों से फाइल की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की और जनहित के इस संवेदनशील मुद्दे को बिना देरी कैबिनेट में भेजने का अनुरोध किया।

राजस्व गाँव के साथ ही विधायक ने इंद्रानगर बिन्दुखत्ता क्षेत्र में हाथी कॉरिडोर और गौला नदी से उत्पन्न हो रहे खतरों पर भी विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि गौला नदी के मध्य भारी मात्रा में उपखनिज जमा हो गए हैं, जो नदी की धारा को आबादी की ओर मोड़कर भीषण भू-कटाव का कारण बन रहे हैं। इससे न केवल ग्रामीणों की भूमि को खतरा है, बल्कि हाथी कॉरिडोर की सुरक्षा भी दांव पर लगी है।
विधायक मोहन सिंह बिष्ट ने प्रमुख सचिव वन और अन्य अधिकारियों से अनुरोध किया कि मानसून से पूर्व गौला नदी का चैनलाइजेशन (Channelization) अथवा चुगान कार्य शुरू कराया जाए। नदी के बीच से उपखनिजों को हटाने से पानी का बहाव सीधा रहेगा, जिससे किनारे सुरक्षित रहेंगे। विधायक ने जोर देकर कहा कि यदि समय रहते सुरक्षात्मक कार्य नहीं किए गए, तो बरसात में क्षेत्र को भारी जान-माल का नुकसान हो सकता है।
वन विभाग के अधिकारियों ने विधायक द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से लिया और राजस्व गाँव के प्रस्ताव में तेजी लाने के साथ-साथ गौला नदी के चैनलाइजेशन के लिए तकनीकी निरीक्षण कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। विधायक बिष्ट की इस सक्रियता से बिन्दुखत्ता की जनता में एक बार फिर उम्मीद जगी है कि दशकों पुरानी राजस्व गाँव की मांग और आपदा से सुरक्षा का समाधान जल्द धरातल पर उतरेगा।
