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नई दिल्ली

राजनीति के रंग

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बिच्छू,गोजर,साँप छिपे हैं खादी में।

बे-हिसाब,बे-नाप छिपे हैं खादी में।

राजनीति सौ रंग भला क्यों न बदले,

गिरगिट के भी बाप छिपे हैं खादी में।

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देवेश द्विवेदी ‘देवेश’

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