हल्द्वानी
हल्द्वानी एमबीपीजी कॉलेज में संकट: 60 प्राध्यापकों का एक साथ तबादला, परीक्षाएं और एडमिशन प्रभावित
हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज में 60 प्राध्यापकों का एक साथ तबादला होने से हड़कंप मच गया है। कुमाऊं विश्वविद्यालय की सेमेस्टर परीक्षाएं और प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।
हल्द्वानी। हल्द्वानी स्थित प्रतिष्ठित एमबीपीजी कॉलेज में एक अभूतपूर्व प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है। कुमाऊं विश्वविद्यालय की मुख्य सेमेस्टर परीक्षाओं और नए सत्र की प्रवेश प्रक्रिया के ऐन बीच कॉलेज के 60 प्राध्यापकों का एक साथ ट्रांसफर कर दिया गया है। इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों के तबादले से कॉलेज की पूरी प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था चरमराने की स्थिति में पहुंच गई है।
इस थोक तबादले का सीधा असर गुरुवार से होने वाली विश्वविद्यालय की परीक्षाओं पर पड़ सकता है। इसके साथ ही, स्नातक प्रथम सेमेस्टर के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और प्रवेश प्रक्रिया की रफ्तार भी बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। खास बात यह है कि जिन शिक्षकों का ट्रांसफर हुआ है, उनमें कॉलेज के चीफ प्रॉक्टर, मुख्य परीक्षा प्रभारी, इग्नू प्रभारी, एनएसएस प्रभारी और कई महत्वपूर्ण विभागों के विभागाध्यक्ष शामिल हैं।
आंकड़ों के लिहाज से देखें तो वर्तमान में एमबीपीजी कॉलेज में प्राध्यापकों के कुल 131 स्वीकृत पदों के मुकाबले 129 शिक्षक कार्यरत हैं। इस नए आदेश के बाद कॉलेज में कुल पदों के सापेक्ष आधे से भी कम शिक्षक बचेंगे। हालांकि शासन ने इन शिक्षकों के प्रतिस्थानी (रिप्लेसमेंट) भेजे हैं, लेकिन नई ज्वाइनिंग के लिए एक हफ्ते का समय दिया गया है, जिससे मौजूदा कार्यों में भारी रुकावट आना तय है।
तबादला आदेश जारी होते ही कॉलेज प्रशासन में अफरातफरी मच गई है और तीन प्राध्यापकों को रानीखेत महाविद्यालय के लिए तुरंत रिलीव भी कर दिया गया है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एनएस बनकोटी ने बताया कि एक साथ इतने बड़े पैमाने पर तबादले होने से परीक्षा संचालन और नई प्रवेश प्रक्रिया को संभालना बेहद मुश्किल हो गया है। उन्होंने साफ किया कि मौजूदा व्यवस्था को देखते हुए सभी प्राध्यापकों को तत्काल कार्यमुक्त करना एक बड़ी चुनौती है।
इस बंपर तबादला सूची में एमबीपीजी कॉलेज के अलावा राजकीय महिला कॉलेज और शहर डिग्री कॉलेज गौलापार के भी कई वरिष्ठ प्राध्यापकों के नाम शामिल हैं। छात्र संगठनों और शिक्षक संघ ने इस संवेदनशील समय पर किए गए तबादलों पर चिंता जताई है। छात्रों का कहना है कि परीक्षाओं और प्रवेश के समय ऐसे प्रशासनिक फैसलों से उनका भविष्य अधर में लटक सकता है।
