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हल्द्वानी

कॉमरेड राजा बहुगुणा का निधन, बिंदुखत्ता आंदोलन के पुरोधा को अंतिम विदाई

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उत्तराखंड में भाकपा (माले) के कद्दावर नेता और बिंदुखत्ता बसासत आंदोलन के नायक कॉमरेड राजा बहुगुणा का लंबी बीमारी के बाद निधन। जानें उनके संघर्षशील जीवन और अंतिम विदाई की पूरी जानकारी।

हल्द्वानी। कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी (भाकपा-माले) के वरिष्ठ और जुझारू नेता, कॉमरेड राजा बहुगुणा का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। उत्तराखंड में भाकपा (माले) की स्थापना के समय से ही वह एक मजबूत स्तंभ रहे थे। वर्तमान में वह पार्टी के केंद्रीय कंट्रोल कमीशन के चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. कैलाश पांडे ने उनके दुखद निधन की पुष्टि की। बहुगुणा बीते कई महीनों से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। दुख की खबर आने के बाद से बिंदुखत्ता सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।
कॉमरेड राजा बहुगुणा का देहावसान लिवर कैंसर के कारण दिल्ली के एक अस्पताल में हुआ। उनका पार्थिव शरीर आज दिल्ली से बिंदुखत्ता लाया जाएगा। पार्थिव शरीर को बिंदुखत्ता स्थित पार्टी कार्यालय में रखा जाएगा। यहाँ कार्यकर्ता और समर्थक उन्हें अंतिम विदाई देंगे। पार्टी कार्यालय में कल दोपहर एक बजे तक विदाई सलामी देने के बाद, उनकी अंतिम यात्रा रानीबाग, काठगोदाम (हल्द्वानी) स्थित विद्युत शवदाह गृह के लिए प्रस्थान करेगी।
राजा बहुगुणा को उनकी कर्मठता, जुझारूपन और संघर्षशील व्यक्तित्व के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उनका सबसे बड़ा योगदान बिंदुखत्ता बसासत आंदोलन और राजस्व गांव संघर्ष में माना जाता है। इस संघर्ष में उनकी भूमिका निर्णायक और ऐतिहासिक थी। उन्होंने हमेशा हाशिये पर खड़े लोगों के हक और अधिकारों के लिए आवाज उठाई। उनकी प्रतिबद्धता ने संगठन के भीतर और बाहर एक मजबूत पहचान बनाई। उनके निधन को पार्टी कार्यकर्ताओं ने संगठन के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है। उनके साथी उन्हें ‘लाल सलाम!’ देते हुए उनके अरमानों को मंज़िल तक पहुंचाने का संकल्प ले रहे हैं।
पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और तमाम संगठनों ने कॉमरेड बहुगुणा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उनका जाना उत्तराखंड की वामपंथी राजनीति और जन-संघर्षों के लिए एक बड़ा नुकसान है। स्थानीय जनता उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखती है जिसने अपने जीवन का हर पल गरीब और मजदूर वर्ग को समर्पित कर दिया।

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