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देहरादून

देहरादून: पूर्व मुख्य सचिव का बेटा फर्जी IPS बनकर गिरफ्तार, लाखों की ठगी

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देहरादून पुलिस ने पूर्व मुख्य सचिव एस. रामास्वामी के बेटे आर. यशोवर्धन को फर्जी IPS और RAW एजेंट बनकर लाखों की ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है।

देहरादून। पुलिस ने एक बेहद हाई-प्रोफाइल ठगी मामले का भंडाफोड़ करते हुए पूर्व मुख्य सचिव एस० रामास्वामी के बेटे आर० यशोवर्धन (35) को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को फर्जी आईपीएस (IPS) अधिकारी, रॉ (RAW) एजेंट और सेना का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों को झांसे में लेता था। एसएसपी देहरादून के निर्देश पर राजपुर थाना पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जाल बिछाकर आरोपी को ओल्ड मसूरी रोड स्थित सीएसआई (CSI) तिराहे से दबोच लिया।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी यशोवर्धन के खिलाफ राजपुर थाने में धोखाधड़ी के दो गंभीर मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें उसने कुल 19.60 लाख रुपये की ठगी की है। उसने पहली ठगी डाकरा बाजार निवासी अंशुल उपाध्याय से कंपनी रजिस्ट्रेशन और स्टार्टअप फंडिंग के नाम पर 15 लाख रुपये की की थी। वहीं, दूसरी ठगी में आरोपी ने एक महिला वैज्ञानिक डॉ० अनुषा को रक्षा मंत्रालय में ‘डेटा साइंस कंसलटेंट’ की नौकरी दिलाने का झांसा देकर 4.60 लाख रुपये ऐंठ लिए।
एसपी सिटी प्रमोद कुमार के अनुसार, आरोपी बचपन से ही प्रशासनिक अधिकारियों का रुतबा देखकर प्रभावित था। उसने कई वर्षों तक संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी की, लेकिन असफल होने पर उसने जालसाजी का रास्ता चुन लिया। उसने लोगों पर रौब झाड़ने के लिए फर्जी आईडी, विजिटिंग कार्ड और पुलिस व सेना की वर्दियां तैयार करवा ली थीं। पुलिस ने उसके पास से 5 फर्जी आईडी कार्ड, 8 नकली विजिटिंग कार्ड, सेना व पुलिस की 3 जोड़ी वर्दियां, एक वायरलेस सेट और एक लैपटॉप बरामद किया है। दिलचस्प बात यह है कि गिरफ्तार आरोपी यशोवर्धन पिछले साल 14 नवंबर को एक विवाद में पीड़ित भी रह चुका है। तब पूर्व भाजपा विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के बेटे दिव्य प्रताप सिंह और उसके साथियों पर मसूरी डायवर्जन के पास यशोवर्धन के साथ बीच सड़क पर बेरहमी से मारपीट करने का आरोप लगा था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। देहरादून पुलिस अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि यशोवर्धन ने पिछले कुछ वर्षों में और कितने लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाया है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के बाद इस हाई-प्रोफाइल जालसाजी नेटवर्क से जुड़े कुछ और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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