देहरादून
देहरादून IMA पासिंग आउट परेड में शामिल होंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, पहली बार महिला कैडेट्स भी रचेंगी इतिहास
देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) की पासिंग आउट परेड में इस बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि होंगी। इस गौरवशाली परेड में पहली बार महिला कैडेट्स भी कदमताल करेंगी।
देहरादून। देश की आन-बान और शान के प्रतीक देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) में आगामी पासिंग आउट परेड (POP) की तैयारियां बेहद जोर-शोर से चल रही हैं। इस वर्ष का यह भव्य दीक्षांत समारोह बेहद खास और ऐतिहासिक होने जा रहा है, क्योंकि महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में इस गौरवशाली परेड में शामिल होंगी। राष्ट्रपति के आगमन की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद से ही आईएमए परिसर में तैयारियों को लेकर कैडेट्स और अधिकारियों के बीच एक नया और जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
इस बार की पासिंग आउट परेड भारतीय सैन्य अकादमी के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रही है। इस साल की परेड में पहली बार महिला कैडेट्स भी कदमताल करती नजर आएंगी, जिसे आईएमए प्रशासन अपने लिए एक बेहद गौरवशाली और ऐतिहासिक क्षण के तौर पर देख रहा है। यह भव्य परेड कैडेट्स के कड़े सैन्य प्रशिक्षण सत्र के समापन का प्रतीक है। इसके ठीक बाद देश और विदेश के जांबाज कैडेट्स को भारतीय थल सेना के अलग-अलग अंगों में सैन्य अधिकारी के रूप में कमीशन प्रदान किया जाएगा।
ऐतिहासिक परेड को पूरी तरह सफल और त्रुटिहीन बनाने के लिए जेंटलमैन और महिला कैडेट्स सुबह से ही मैदान में पसीना बहा रहे हैं। कैडेट्स द्वारा ड्रिल, मार्चिंग और हथियारों के साथ कड़ा नियमित अभ्यास किया जा रहा है। आईएमए के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और प्रशिक्षक खुद मैदान पर मौजूद रहकर कैडेट्स की क्षमता और अनुशासन को सर्वोच्च स्तर पर बनाए रखने के लिए विशेष प्रशिक्षण दे रहे हैं। राष्ट्रपति के सम्मुख सलामी मंच से गुजरते हुए देश सेवा की शपथ लेने की भावना कैडेट्स में नया जोश भर रही है।
गौरवशाली इतिहास को समेटे इंडियन मिलिट्री एकेडमी की स्थापना ब्रिटिश काल में 1 अक्टूबर 1932 को हुई थी, जिसका विधिवत उद्घाटन तत्कालीन कमांडर-इन-चीफ फील्ड मार्शल सर फिलिप चेटवोड ने किया था। शुरुआत में इस अकादमी की क्षमता केवल 40 जेंटलमैन कैडेट्स को प्रशिक्षित करने की थी, जो वर्तमान में बढ़कर 1650 कैडेट्स तक पहुंच चुकी है। अपने स्थापना काल से लेकर अब तक आईएमए देश को 64,000 से अधिक जांबाज सैन्य अधिकारी दे चुका है, जो सरहदों पर देश की रक्षा कर रहे हैं।
