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हल्द्वानी

काठगोदाम-अमृतपुर बाईपास को पर्यावरणीय मंजूरी, कुमाऊं को जाम से मिलेगी ऐतिहासिक राहत

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काठगोदाम-अमृतपुर बाईपास के निर्माण को केंद्र से स्टेज-वन पर्यावरणीय स्वीकृति मिली। 3.5 किमी बाईपास से हल्द्वानी-नैनीताल समेत पूरे कुमाऊं को जाम से राहत मिलेगी। जानिए कब शुरू होगा निर्माण कार्य।

भीमताल। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के लिए एक बड़ी राहत की ख़बर सामने आई है। काठगोदाम-अमृतपुर बाईपास के निर्माण के लिए भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (क्षेत्रीय कार्यालय दून) से स्टेज-वन की पर्यावरणीय स्वीकृति मिल गई है। इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को अब जल्द ही शुरू किया जा सकेगा, जिससे नैनीताल-भीमताल और हल्द्वानी-काठगोदाम शहर को हमेशा लगने वाले भीषण जाम से बड़ी राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद से ही इस बाईपास की कवायद तेजी से चल रही थी।
बाईपास से बदलेगी कुमाऊं की तस्वीर
यह बाईपास काठगोदाम गौलापुल से अमृतपुर तक 3.5 किलोमीटर लंबी टू-लेन सड़क और एक 90 मीटर लंबे पुल के रूप में बनेगा। इस प्रोजेक्ट के लिए प्रशासन ने नैनीताल वन प्रभाग को 6.54 हेक्टेयर वन भूमि क्षतिपूरक वनीकरण के लिए दी है। इस मार्ग के बनने से विशेषकर गुलाब घाटी के पास होने वाली ट्रैफिक की समस्या खत्म हो जाएगी। विधायक राम सिंह कैड़ा ने पुष्टि करते हुए बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर धामी और सांसद अजय भट्ट से मिलकर इस कार्य में तेजी लाने का आग्रह किया था। उन्होंने दोनों नेताओं का आभार व्यक्त किया है।
स्वीकृति की प्रक्रिया हुई पूरी
जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) ने अगस्त में वन विभाग की आपत्तियों को दूर करते हुए नए सिरे से प्रस्ताव शासन को भेजा था। सितंबर में वन भूमि हस्तांतरण को राज्य सरकार से मंजूरी मिली। इसके बाद लोनिवि ने केंद्र की स्वीकृति के लिए प्रस्ताव अपलोड किया था। अब स्टेज-वन की पर्यावरणीय स्वीकृति मिलने के बाद राज्य सरकार जरूरी शर्तें पूरी करेगी और स्टेज-दो की फाइनल अप्रूवल प्राप्त करेगी। इस अंतिम मंजूरी के मिलते ही काठगोदाम बाईपास के लिए वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी और निर्माण कार्य जल्द ही धरातल पर उतरेगा।
पर्यटन और स्थानीय लोगों को होगा बड़ा फायदा
इस बाईपास के बनने से न सिर्फ हल्द्वानी के स्थानीय निवासियों बल्कि नैनीताल, भीमताल, रानीखेत, और पिथौरागढ़ जैसे कुमाऊं के बड़े हिस्सों में जाने वाले पर्यटकों को भी बहुत फायदा मिलेगा। घंटों जाम में फंसे रहने की मजबूरी खत्म होगी। यह बाईपास उत्तराखंड में कनेक्टिविटी और पर्यटन विकास की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। यह दिखाता है कि सरकार मूलभूत इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

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