हल्द्वानी
हल्द्वानी में ईमानदारी की मिसाल: खाते में आए गलत ₹50 हजार, तुरंत लौटाए
हल्द्वानी के समाजसेवी विशाल वर्मा के खाते में दिल्ली के व्यक्ति ने गलती से भेजे ₹50,000। अस्पताल में भर्ती मरीज की गंभीरता को देख तुरंत वापस लौटाई रकम।
हल्द्वानी। आज के इस दौर में जहां आए दिन ऑनलाइन धोखाधड़ी और पैसों की हेराफेरी की खबरें सामने आती रहती हैं, वहीं उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर से ईमानदारी और उच्च मानवीय मूल्यों की एक बेहद खूबसूरत मिसाल सामने आई है। यहाँ एक अनजान व्यक्ति द्वारा गलती से खाते में ट्रांसफर की गई 50 हजार रुपये की मोटी रकम को हल्द्वानी के एक समाजसेवी ने पूरी ईमानदारी और तत्परता दिखाते हुए तुरंत वापस लौटा दिया।
मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए क्षेत्र की पूर्व पार्षद प्रत्याशी अंजलि वर्मा ने बताया कि दिल्ली निवासी एक शख्स ने बैंकिंग त्रुटि के कारण गलती से 50 हजार रुपये की धनराशि हल्द्वानी निवासी उनके पति और समाजसेवी विशाल वर्मा के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दी थी। इतनी बड़ी रकम खाते में आने के बाद जब विशाल वर्मा को इसकी जानकारी हुई, तो उन्होंने तुरंत उस व्यक्ति से संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया।
इसके बाद दिल्ली निवासी पीड़ित शख्स द्वारा समाजसेवी विशाल वर्मा से संपर्क किया गया। उक्त व्यक्ति ने अपनी मजबूरी बताते हुए कहा कि उसके एक करीबी मित्र की माता जी दिल्ली के एक अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही हैं। अस्पताल में इलाज के दौरान अचानक कुछ धनराशि कम पड़ने पर उसने अपने मित्र की आर्थिक मदद करने के लिए 50 हजार रुपये भेजे थे, लेकिन एक नंबर की गलती के कारण वह रकम विशाल वर्मा के खाते में आ गई।
समाजसेवी विशाल वर्मा ने मामले की पूरी संवेदनशीलता और अस्पताल में भर्ती बुजुर्ग महिला की गंभीर स्थिति को गहराई से समझा। उन्होंने बिना एक पल का भी वक्त गंवाए और बिना किसी कानूनी औपचारिकता की देरी किए, तुरंत पीड़ित व्यक्ति सरफराज सैफी (Sarfraj Saifi) के बैंक खाते में पूरी की पूरी 50 हजार रुपये की धनराशि सुरक्षित वापस ट्रांसफर कर दी।
इस संकट की घड़ी में समय पर अपनी गाढ़ी कमाई वापस मिलने पर सरफराज सैफी ने हल्द्वानी के इस समाजसेवी परिवार का सहृदय आभार व्यक्त किया। विशाल वर्मा की इस त्वरित ईमानदारी और मानवतावादी सोच की अब पूरे हल्द्वानी शहर और सोशल मीडिया पर जमकर सराहना की जा रही है। लोगों का कहना है कि ऐसे ही नेक दिल इंसान समाज में आज भी इंसानियत और भरोसे को जिंदा रखे हुए हैं।
