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उत्तराखण्ड

धामी सरकार का ‘महा-सत्यापन’: उत्तराखंड में 10 साल पुराने आधार, राशन कार्ड की होगी जांच, अवैध प्रवासियों पर गिरेगी गाज

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की जनसांख्यिकी (Demography) में बदलाव रोकने के लिए कड़ा कदम उठाया है। अब 10 साल की अवधि में बने आधार, राशन, वोटर कार्ड और बिजली-पानी कनेक्शन का सत्यापन होगा। जानें ऑपरेशन कालनेमि और अधिकारियों पर कार्रवाई की पूरी जानकारी।

देहरादून। उत्तराखंड में अवैध रूप से आकर बस रहे लोगों की पहचान करने और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए राज्य सरकार ने सत्यापन का दायरा बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को घोषणा की कि राज्य में पिछले 10 साल की अवधि में बने सभी तरह के राशन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर कार्ड और बिजली-पानी के कनेक्शनों का अब सघन सत्यापन कराया जाएगा। इसके लिए सभी जिलों के जिलाधिकारियों (DM) को तत्काल प्रभाव से निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
देवभूमि की पहचान बचाने पर जोर
पुलिस लाइन में विधिक दिवस समारोह के बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में प्रमाणपत्रों की जांच पहले ही शुरू कर दी गई थी, लेकिन अब गंभीर तथ्यों को देखते हुए सत्यापन अवधि का दायरा बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि उत्तराखंड की एक विशिष्ट सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान है जिसे ‘देवभूमि’ के रूप में जाना जाता है, और हाल के कुछ सालों में इस डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) में बदलाव देखने को मिला है। सरकार इस पहचान को यथावत बनाए रखने के लिए संकल्पित है।
ऑपरेशन कालनेमि और ज़मीन कब्ज़ाने का नेटवर्क
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार ने हालिया वक्त में कई कड़े कदम उठाए हैं। उन्होंने ‘ऑपरेशन कालनेमि’ का जिक्र किया, जिसके दौरान कई ऐसे लोग पकड़े गए जो छद्म पहचान बनाकर राज्य में रह रहे थे और लोगों की भावनाओं तथा आस्था के साथ खिलवाड़ कर रहे थे। उन्होंने बताया कि जमीनों को कब्जाने का एक पूरा संगठित नेटवर्क चल रहा था, जिसे सरकार ने ध्वस्त किया है। अब अवैध रूप से बसने की सुनियोजित कोशिशों को रोकने के लिए सत्यापन अभियान को और सख्ती से चलाया जा रहा है।
फर्जी दस्तावेज़ बनाने वालों पर भी कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि न केवल गलत दस्तावेजों के जरिए राज्य में अवैध रूप से बसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, बल्कि उनके फर्जी प्रमाणपत्र बनाने वाले अधिकारी और कार्मिकों के खिलाफ भी कठोरता से निपटा जाएगा। मालूम हो कि, हल्द्वानी में यूपी के लोगों के फर्जी प्रमाणपत्र बनाने का मामला सामने आने के बाद सरकार ने शिकंजा और कस दिया है। मुख्यमंत्री ने 17 नवंबर को हुई वर्चुअल बैठक में पहले 3 साल के प्रमाणपत्रों के सत्यापन के निर्देश दिए थे, जिसे अब बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया है।

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