Report by : CWN Desk
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हल्द्वानी गौ-कुकृत्य मामला: ‘मुस्लिम युवक’ की अफवाह निकली झूठी, पुलिस ने गैर-मुस्लिम आरोपी को दबोचा

हल्द्वानी के मुखानी में गाय से कुकृत्य के वायरल वीडियो की सच्चाई आई सामने। जिस पर मुस्लिम युवक का आरोप था, वह निकला सुनील कुमार (24) निवासी रामपुर, यू.पी.। नैनीताल पुलिस ने गहन जांच के बाद किया गिरफ्तार।

हल्द्वानी। मुखानी थाना क्षेत्र में पिछले दिनों गाय के साथ अमानवीय कृत्य का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था। वीडियो सामने आते ही कुछ अराजक तत्वों द्वारा सोशल मीडिया पर यह दावा किया जाने लगा कि घटना को अंजाम देने वाला एक ‘मुस्लिम युवक’ है, जिसके बाद महिलाओं ने प्रदर्शन किया और माहौल तनावपूर्ण हो गया था। हालांकि, नैनीताल पुलिस की गहन और त्वरित जाँच ने इस झूठी अफवाह का पर्दाफाश कर दिया है।


सीसीटीवी फुटेज से खुला राज, आरोपी गैर-मुस्लिम निकला


दिनांक 02 नवंबर 2025 को मुखानी थाने में एक अज्ञात मुस्लिम युवक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, एसएसपी नैनीताल श्री मंजुनाथ टीसी ने तत्काल एसपी हल्द्वानी को विशेष टीम गठित कर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। सीओ हल्द्वानी श्री नितिन लोहनी के पर्यवेक्षण में पुलिस टीम ने घटनास्थल से लेकर दिल्ली तक के सीसीटीवी कैमरों का गहनता से अवलोकन किया। एक सप्ताह की लगातार मेहनत के बाद, टीम ने संदिग्ध की पहचान की और 07 नवंबर 2025 को उसे रुद्रपुर के किच्छा बाईपास से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान सुनील कुमार (24 वर्ष), पुत्र मिड़हीलाल, निवासी रामपुर (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई है।


मजदूरी करने हल्द्वानी आया था सुनील कुमार


पूछताछ में गिरफ्तार सुनील कुमार ने बताया कि वह 28 अक्टूबर 2025 को मजदूरी करने के उद्देश्य से हल्द्वानी आया था। उसने स्वीकार किया कि उसने अपनी अमानवीय मानसिकता के कारण इस घृणित हरकत को अंजाम दिया था। पुलिस के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध दिखाई दिया था, लेकिन स्थानीय लोगों द्वारा फुटेज देखने पर आरोपी तुरंत अपना सामान लेकर फरार हो गया था। पुलिस टीम ने तकनीकी माध्यमों और सूचना संकलन से उसका लोकेशन पता लगाकर उसे दबोचा। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर संख्या 237/25, धारा 299 BNS एवं 11 पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।


अफवाहों पर न करें भरोसा, तथ्यों पर ध्यान दें


यह घटना सोशल मीडिया पर फैलाई जाने वाली झूठी खबरों और अफवाहों की गंभीरता को उजागर करती है। कई जिम्मेदार नागरिकों ने इस बात पर जोर दिया है कि पत्रकारिता और आम जनता को भी सुनी-सुनाई बातों या भड़काऊ सोशल मीडिया पोस्ट पर भरोसा नहीं करना चाहिए। पुलिस की इस कार्रवाई ने सच्चाई सामने लाकर सामाजिक सद्भाव बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लोगों से अपील है कि वे केवल अच्छे पत्रकारों की और तथ्यात्मक खबरों पर ही भरोसा करें।

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