हल्द्वानी
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026: कंप्यूटर ड्रॉ से चुने गए 480 तीर्थयात्री, देखें पूरा शेड्यूल
विदेश मंत्रालय ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए 480 श्रद्धालुओं का चयन कंप्यूटर ड्रॉ से पूरा कर लिया है। जानिए दिल्ली से नाभीढांग तक का पूरा यात्रा रूट और शेड्यूल।
हल्द्वानी। इस वर्ष की पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने के इच्छुक श्रद्धालुओं का इंतजार अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। विदेश मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष कंप्यूटरीकृत ड्रॉ के जरिए यात्रा के लिए चयन प्रक्रिया को सफलतापूर्व पूरा कर लिया गया है। इस साल कुल 1980 आवेदकों ने इस बेहद पावन यात्रा के लिए अपना पंजीकरण कराया था, जिनमें से लॉटरी प्रणाली द्वारा 480 भाग्यशाली श्रद्धालुओं का चयन किया गया है। इन सभी चयनित यात्रियों को 10 अलग-अलग समूहों (बैचों) में पवित्र कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर भेजा जाएगा, जबकि शेष बचे 1500 आवेदकों को फिलहाल प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) में रखा गया है।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुई इस पारदर्शी चयन प्रक्रिया के दौरान आवेदकों में भारी उत्साह और उत्सुकता देखने को मिली। जैसे ही कंप्यूटर स्क्रीन पर लॉटरी के अंतिम परिणाम घोषित हुए, वैसे ही चयनित श्रद्धालुओं और उनके परिवारों में उत्सव और परम आनंद का माहौल बन गया। वहीं, दूसरी ओर जिन आवेदकों का नाम मुख्य या प्रतीक्षा सूची में स्थान नहीं बना पाया, उनके हाथ थोड़ी मायूसी जरूर लगी। हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि मुख्य सूची के किसी यात्री द्वारा नाम वापस लेने पर प्रतीक्षा सूची के आवेदकों को मौका दिया जाएगा।
कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, इस दुर्गम यात्रा का पूरा कार्यक्रम और रूट चार्ट भी आधिकारिक तौर पर फाइनल कर दिया गया है। आगामी 30 जून को सभी चयनित श्रद्धालुओं का देश की राजधानी दिल्ली में एकत्रीकरण और अनिवार्य मेडिकल चेकअप होगा। इसके बाद 4 जुलाई को पहला जत्था औपचारिक रूप से दिल्ली से प्रस्थान कर टनकपुर पहुँचेगा। अगले दिनों में यात्रा क्रमशः धारचूला और गुंजी क्षेत्र की तरफ आगे बढ़ेगी, जहाँ 7 जुलाई को यात्रियों के स्वास्थ्य की जांच के लिए एक दिन का अनिवार्य विश्राम रखा गया है, जिसके बाद 8 जुलाई को दल नाभीढांग की ओर प्रस्थान करेगा।
भौगोलिक रूप से बेहद कठिन और सीमांत क्षेत्रों में होने वाली इस यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए उत्तराखंड का स्थानीय प्रशासन युद्ध स्तर पर तैयारियों में जुटा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए संवेदनशील पहाड़ी रूटों पर आधुनिक चिकित्सा शिविर, सुरक्षित परिवहन और चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सनातन हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन संप्रदाय के करोड़ों अनुयायियों की अटूट आस्था का केंद्र होने के कारण इस यात्रा का सांस्कृतिक महत्व बहुत बड़ा है। सुरक्षा और नाजुक हिमालयी पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए ही सरकार द्वारा हर साल सीटों की संख्या को बेहद सीमित रखा जाता है।
