हल्द्वानी
भीमताल कांग्रेस में बगावत के सुर: नेताओं ने दी चेतावनी—’बाहरी प्रत्याशी को टिकट दिया तो भुगतना होगा खामियाजा’
हल्द्वानी में भीमताल विधानसभा के वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बाहरी प्रत्याशियों का विरोध किया। कार्यकर्ता ने स्थानीय उम्मीदवार के लिए 1 करोड़ रुपये खर्च करने का किया एलान।
हल्द्वानी। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है। इसी क्रम में भीमताल विधानसभा से कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने हल्द्वानी में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को कड़ा संदेश दिया है। नेताओं ने दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी किसी ‘आयातित’ या बाहरी व्यक्ति को टिकट दिया गया, तो पार्टी को चुनाव में इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
पूर्व राज्य मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश पनेरु, केदार पलड़िया और राजेश बृजवासी सहित कई दिग्गज नेताओं ने पिछले चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि भीमताल में बाहरी नेताओं को तरजीह देने के कारण ही कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है। उन्होंने मांग की है कि 2027 में केवल स्थानीय, मजबूत और समर्पित कार्यकर्ता को ही चुनावी मैदान में उतारा जाए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उस समय नया मोड़ आया जब वरिष्ठ नेता राजेश बृजवासी ने एक बड़ा एलान कर दिया। उन्होंने पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा दिखाते हुए कहा कि यदि कांग्रेस किसी भी समर्पित और स्थानीय कार्यकर्ता को टिकट देती है, तो वह चुनाव में अपनी ओर से एक करोड़ रुपये खर्च करने को तैयार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानीय प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने के लिए सभी मूल कार्यकर्ता एकजुट होकर काम करेंगे।
वरिष्ठ नेताओं का तर्क है कि बाहरी प्रत्याशी क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों से अनजान होते हैं, जिससे स्थानीय कार्यकर्ताओं में निराशा फैलती है। “हवा-हवाई” नेताओं के बजाय जमीन पर काम करने वाले “टिकाऊ और ईमानदार” चेहरों को आगे लाने की मांग अब जोर पकड़ रही है। नेताओं ने एक सुर में कहा कि यदि पार्टी ने उनकी मांगों की अनदेखी की और फिर से किसी बाहरी चेहरे को थोपा, तो कांग्रेस के मूल कार्यकर्ता इसका पुरजोर विरोध करेंगे।
भीमताल विधानसभा में कांग्रेस के भीतर उपजा यह असंतोष संगठन के लिए खतरे की घंटी हो सकता है। जहाँ एक ओर भाजपा की किलेबंदी तोड़ने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर अपनों की नाराजगी दूर करना प्रदेश नेतृत्व के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा। अब देखना यह होगा कि दिल्ली और देहरादून में बैठे कांग्रेस के रणनीतिकार भीमताल के इन कद्दावर नेताओं की ‘हुंकार’ पर क्या रुख अपनाते हैं।
