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नई दिल्ली

मिश्रित कृषि से आत्मनिर्भर बन सकते हैं पहाड़ के किसान

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मखौलिया की किसान पाठशाला पहुंचे कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक

पिथौरागढ। कृषि विज्ञान केन्द्र गैना के वैज्ञानिकों ने पर्वतीय क्षेत्र के काश्तकारों को मिश्रित खेती अपनाने की अपील की है। उन्होंने धनौडा स्थित केडी मखौलिया की किसान पाठशाला का निरीक्षण करते हुए कहा कि बिशुद्ध रूप से जैविक कृषि किसानों को आत्मनिर्भर बना सकती है। काश्तकार केशव मखौलिया ने यह साबित कर दिखा दिया है।

केवीके गैना के वैज्ञानिक डाक्टर जीएस बिष्ट, डाक्टर अलंकार सिंह, डाक्टर महेंद्र सिंह, डाक्टर कंचन आर्या, डाक्टर कुशवाहा और मनरेगा लोकपाल जगदीश कलौनी ने मखौलिया किसान पाठशाला को पर्वतीय क्षेत्र के काश्तकारों के लिए मील का पत्थर बताया। इस पाठशाला में पूर्व सैनिक और प्रगतिशील किसान केडी मखौलिया ने आडू, पुलम, नाशपाती, अखरोट, दालचीनी, अमरूद, सेव, केला, पपीता उत्पादन के साथ ही टमाटर, बैगन, मिर्च, भिंडी, बीन्स जैसी कई तरह की सब्जियों का व्यावसायिक तौर पर उत्पादन किया है। इस पाठशाला में गौ पालन, मधुमक्खी पालन, मुर्गीपालन भी किया जा रहा है। केवीके के वैज्ञानिकों ने इस दौरान उपस्थित किसानों को जैविक जीवामृत की जानकारी दी और कहा कि खेती, बागवानी को कीटों से बचाने के लिए जीवामृत एक चमत्कारिक उपचार है। उन्होंने छोटी जोत में सफलतापूर्वक जैविक मिश्रित खेती करने वाले किसान श्री पुरस्कार प्राप्त पूर्व सैनिक केशव मखौलिया के प्रयासों की सराहना करते हुए इस पाठशाला का लाभ लेने की अपील काश्तकारों से की।
इस दौरान मनरेगा लोकपाल जगदीश कलौनी ने काश्तकारों को जैविक कृषि अपनाने और मनरेगा की योजनाओं में इस तकनीक को अपनाने की अपील की।कार्यक्रम में धनौडा के पूर्व प्रधान जगदीश मखौलिया, काश्तकार रवि शर्मा, जमन सिंह मुडेला, रमेश भट्ट, रमेश कापड़ी, नवीन भट्ट आदि शामिल थे।

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