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देहरादून

मोहन भागवत का देहरादून में बड़ा बयान: घुसपैठियों को न दें रोजगार, तीन बच्चों की वकालत

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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने देहरादून में घुसपैठियों को राष्ट्र के लिए संकट बताया। उन्होंने समाज से इन्हें काम न देने और तीन बच्चे पैदा करने की अपील की। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

देहरादून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने सोमवार को देहरादून में देश की सुरक्षा और सामाजिक ढांचे को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। पूर्व सैनिक संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि अवैध रूप से भारत में घुसने वाले लोग राष्ट्र के लिए एक बड़ा संकट हैं। भागवत के अनुसार, ये घुसपैठिए हमारे नागरिक नहीं हैं और समाज को इनके प्रति अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।
संघ प्रमुख ने जनता से एक भावुक अपील करते हुए कहा कि किसी भी संदिग्ध विदेशी घुसपैठिए को रोजगार न दिया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि ये लोग कम कीमत पर काम करने का लालच देकर समाज में घुलने-मिलने की कोशिश करते हैं। भागवत ने जोर देकर कहा कि थोड़े से आर्थिक लाभ के लिए देश की सुरक्षा और अखंडता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
संवाद के दौरान उन्होंने जनसंख्या के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। मोहन भागवत ने प्रति परिवार तीन बच्चे होने के विचार की पुरजोर पैरवी की। उन्होंने मनोवैज्ञानिकों का हवाला देते हुए कहा कि जिस घर में तीन बच्चे होते हैं, वे आपस में मिल-जुलकर रहना और विनम्र होना सीखते हैं। उनके अनुसार, ऐसे बच्चों में अहंकार कम होता है और वे बेहतर सामाजिक नागरिक बनते हैं।
हिंदू समाज की एकजुटता पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि संघ का लक्ष्य देश को बिखराव के संकट से बचाना है। उन्होंने इस धारणा को तोड़ने का आह्वान किया कि हिंदू केवल संकट के समय ही साथ आते हैं। भागवत ने स्पष्ट किया कि आरएसएस कोई राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि इसका मुख्य कार्य हिंदुओं को संगठित करना और राष्ट्र की आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करना है।
अंत में, उन्होंने कहा कि संघ हर प्रकार के संकट, चाहे वह प्राकृतिक (आसमानी) हो या मानव निर्मित (सुल्तानी), में सदैव सजग रहा है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि घुसपैठियों को चिन्हित करने में शासन-प्रशासन की मदद करें। यह सामूहिक जिम्मेदारी ही देश को आने वाले खतरों से सुरक्षित रख सकती है और एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकती है।

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