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नई दिल्ली

माँ

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आज नहीं जो हो पाती है,
बेशक कल हो जाती है।
माँ जब साथ में होती है,
हर मुश्किल हल हो जाती है।
बस मेहनत की रोटी खाना,
कह हाथ फेरती है सिर पर।
हर बूँद पसीने की माथे की,
गंगाजल हो जाती है।

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माँ न रही हो पूज्य जगत में
ऐसा कोई दौर नहीं,
माँ के शीतल आँचल जैसा
दिखता कोई ठौर नहीं,
लाखों रिश्ते मिल जायें पर
बच्चे करते गौर नहीं,
उनकी खातिर माँ से बेहतर
दुनिया में कोई और नहीं।

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देवेश द्विवेदी ‘देवेश

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