हल्द्वानी
भगत सिंह के शहादत दिवस पर हल्द्वानी में विचार गोष्ठी: ‘साम्राज्यवाद का नाश हो’ के लगे नारे
हल्द्वानी में पछास के आह्वान पर ‘साम्राज्यवादी युद्ध और भगत सिंह’ विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित। वक्ताओं ने अमेरिकी साम्राज्यवाद और वर्तमान युद्धों पर जताई चिंता।
हल्द्वानी: शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के शहादत दिवस की पूर्व संध्या पर हल्द्वानी में एक वैचारिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) के आह्वान पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय “साम्राज्यवादी युद्ध और भगत सिंह” रहा। गोष्ठी की शुरुआत क्रांतिकारी गीतों के साथ हुई, जिसमें ‘ऐ भगत सिंह तू जिंदा है’ के स्वरों ने उपस्थित युवाओं में जोश भर दिया।
गोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने भगत सिंह के संगठन ‘हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन’ (HSRA) के सिद्धांतों को याद किया। उन्होंने कहा कि क्रांतिकारियों ने साम्राज्यवाद को “बड़ी डकैती” करार दिया था। वक्ताओं के अनुसार, आज भी दुनिया भर में मेहनतकश जनता को साम्राज्यवादी ताकतों द्वारा पीसा जा रहा है। विशेष रूप से अमेरिकी साम्राज्यवाद को वैश्विक शांति और आम जनता का नंबर-1 दुश्मन बताया गया।
वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने ईरान पर थोपे गए युद्ध और अमेरिकी हस्तक्षेप की कड़ी निंदा की। आरोप लगाया गया कि वर्तमान केंद्र सरकार अमेरिकी दबाव में काम कर रही है, जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। तेल और गैस की बढ़ती कीमतों तथा बढ़ती बेरोजगारी को इसी साम्राज्यवादी नीतियों का परिणाम बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि पड़ोसी देशों से बिगड़ते संबंध भी इसी नीति का हिस्सा हैं।
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने युवाओं से आह्वान किया कि वे सांप्रदायिकता और जातिवाद के खिलाफ खड़े हों। उन्होंने जोर दिया कि भगत सिंह के विज्ञान सम्मत तर्कों और क्रांतिकारी संदेशों को गांव-गांव तक पहुँचाना जरूरी है। इस गोष्ठी में पछास, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, भाकपा-माले और भीम आर्मी जैसे कई संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में मानवता और समानता के लिए लड़ने का संकल्प लिया।
