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उत्तराखण्ड

उत्तराखंड में पंचायत चुनाव: देरी की वजह और आगे की राह

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देहरादून: उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायतों का कार्यकाल 27 नवंबर को समाप्त हो रहा है, लेकिन चुनावों को लेकर अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। राज्य सरकार ने पंचायत चुनावों को लेकर 20 अक्टूबर तक रिपोर्ट मांगी थी और विभाग की ओर से रिपोर्ट भी भेज दी गई है।
परिसीमन में हुई बढ़ोतरी
पंचायत निदेशालय की ओर से राज्य में त्रिस्तरीय पंचायतों के चुनाव के लिए हरिद्वार को छोड़कर सभी जिलों में ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायतों का परिसीमन किया गया है। परिसीमन के बाद ग्राम पंचायतों की संख्या में वृद्धि हुई है, हालांकि क्षेत्र पंचायतों की संख्या में कमी आई है। यह कमी शहरी विकास विभाग की ओर से कुछ निकायों का विस्तार और कुछ ग्राम पंचायतों को नगर पालिका क्षेत्र से बाहर करने के कारण हुई है।
चमोली, चंपावत, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में नए सिरे से परिसीमन
चमोली, चंपावत, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिलों के कुछ क्षेत्रों में नए सिरे से परिसीमन किया जाएगा, जिससे इन जिलों में ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायत सीटें घट या बढ़ सकती हैं।
मतदाता सूची का पुनरीक्षण
मतदाता सूची का पुनरीक्षण भी अगले साल जनवरी तक किया जाना है। पुनरीक्षण के बाद ही मतदाता सूची तैयार होगी। ऐसे में अगले साल फरवरी-मार्च के बाद ही चुनाव हो पाएंगे।
पंचायतों का कार्यकाल बढ़ाने की कोई व्यवस्था नहीं
पंचायती राज विभाग के अफसरों के मुताबिक, पंचायतों का कार्यकाल बढ़ाने की एक्ट में कोई व्यवस्था नहीं है। सरकार चाहे तो पंचायत प्रतिनिधियों को अधिकतम छह महीने के लिए प्रशासक बना सकती है।
पंचायत प्रतिनिधियों की मांग
पंचायत प्रतिनिधि चाहते हैं कि पंचायतों का कार्यकाल दो साल बढ़ाया जाए और 12 जिलों में इस साल के बजाए हरिद्वार जिले के साथ वर्ष 2027 में एक साथ पंचायत चुनाव कराए जाएं।

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