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उत्तराखण्ड

रोडवेज बस चालकों की हड़ताल से यात्री बेबस, भटकते रहे यात्री

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आधे रास्ते से लौटीं बसें, दूसरे राज्यों की नहीं आईं, नैनीताल को एक चक्कर के बाद बंद हुई बस सेवा
हल्द्वानी। नए साल के पहले दिन ही रोडवेज बस चालकों ने सड़क हादसे पर नए कानून के विरोध में हड़ताल कर बसों का संचालन बंद कर दिया। तीन दिनी हड़ताल के पहले ही दिन यात्री दिनभर भटकने को मजबूर रहे। दो और दिन लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
हल्द्वानी से हर दिन औसतन 150 बसों का संचालन किया जाता है। चार से पांच हजार यात्री इनमें सफर करते हैं। सोमवार को साल का पहला दिन होने से हल्द्वानी स्टेशन पर सुबह से ही यात्रियों की अच्छी खासी भीड़ जुटने लगी। अधिकांश लोग नववर्ष का जश्न मनाकर लौट रहे थे। सुबह पांच बजे से तय समय के अनुसार बसों का संचालन शुरू हुआ। करीब आठ बजे तक पर्वतीय व मैदानी मार्गों को आधा दर्जन से ज्यादा बसें रवाना हुईं। कुछ देर बाद चालकों को सूचना मिली की देशभर में बस चालक आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। विभिन्न प्रदेशों के रोडवेज चालकों ने हड़ताल में शामिल होने से निर्णय लिया है। इसके बाद स्टेशन से कोई बस रवाना नहीं हुई। एकाएक संचालन ठप होने से अफरा-तफरी का माहौल रहा। दिनभर लोग बसें तलाशते रहे। पूछताछ केंद्र पर भी जानकारी नहीं मिल रही थी।
सोमवार सुबह नैनीताल रूट पर प्रबंधन ने तीन बसों को रवाना किया। नववर्ष का पहला दिन होने से बसों में अच्छी संख्या में सवारियां मौजूद रहीं। इन बसों की नैनीताल से वापसी के बाद चालकों ने संचालन बंद कर दिया। इससे पर्यटकों के साथ ही हर दिन सफर करने वाले कामकाजी यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
राष्ट्रीय हड़ताल में शामिल होने को लेकर सोमवार सुबह रोडवेज चालकों में असमंजस की स्थिति बनी रही। ऐसे में प्रबंधन ने कई बसें दिल्ली, देहरादून के साथ ही यूपी के शहरों के लिए रवाना कर दीं। आधे रास्ते तक पहुंचने के बाद वहां मौजूद हड़ताली चालकों ने इन बसों को रोक दिया। इस बसें सवारियों को वहीं उतार कर हल्द्वानी लौट आईं। दूसरी ओर यूपी, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब से हल्द्वानी आने वाली करीब 90 बसें सोमवार को नहीं आईं।

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