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उत्तराखण्ड

8 सितंबर से शुरू होगा पितृ पक्ष, 21 को होगा पितृ विसर्जन, 22 से नवरात्र की होगी शुरुआत

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हल्द्वानी। पितरों को याद करने और उनके निमित्त श्राद्ध व तर्पण का पावन पर्व पितृ पक्ष इस बार 8 सितंबर से आरंभ हो रहा है। आमतौर पर पितृ पक्ष 16 दिन का माना जाता है, लेकिन इस वर्ष यह 15 दिनों का रहेगा। वहीं श्राद्ध की विधियां 14 दिनों में पूर्ण हो जाएंगी। ज्योतिषाचार्य पं. प्रमोद उप्रेती के अनुसार सात सितंबर को अनंत चतुर्दशी के साथ ही पूर्णिमा तिथि लग जाएगी और अगले दिन प्रतिपदा से पहला श्राद्ध होगा। इस बार तृतीया और चतुर्थी श्राद्ध 10 सितंबर को एक ही दिन पड़ रहे हैं, जिस कारण आगे की तिथियां एक दिन पहले पूरी होंगी।

श्राद्ध तिथियां इस प्रकार रहेंगी – 8 सितंबर प्रतिपदा, 9 द्वितीया, 10 तृतीया व चतुर्थी, 11 पंचमी, 12 षष्ठी, 13 सप्तमी, 14 अष्टमी, 15 नवमी, 16 दशमी, 17 एकादशी, 18 द्वादशी, 19 त्रयोदशी, 20 चतुर्दशी और 21 सितंबर को पितृ विसर्जन। इस दिन स्नान, दान और तर्पण कर पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थनाएं की जाएंगी। पितृ पक्ष का महत्व यह माना जाता है कि इस अवधि में दिवंगत पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्रद्धालु तर्पण और पिंडदान करते हैं।

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पितृ पक्ष की समाप्ति के अगले ही दिन 22 सितंबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होगी। नवरात्र 30 सितंबर तक चलेंगे, जिसमें दुर्गा स्थापना, कलश पूजन, कन्या पूजन और भंडारे का आयोजन होगा। अष्टमी और नवमी पर विभिन्न क्षेत्रों में बड़े मेले भी लगेंगे।

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