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हल्द्वानी

फासीवाद के खतरे के बीच राजा बहुगुणा का जाना बड़ी क्षति: दीपांकर भट्टाचार्य

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हल्द्वानी में भाकपा (माले) द्वारा आयोजित राजा बहुगुणा स्मृति सभा में राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने बहुगुणा को जनपक्षधर विचारधाराओं में एकता स्थापित करने वाला बताया। उत्तराखंड के कई बड़े राजनीतिक और सामाजिक नेता हुए शामिल।

हल्द्वानी। भाकपा (माले) द्वारा रविवार को नगर निगम सभागार में आयोजित राजा बहुगुणा की स्मृति सभा में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। सभा में राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया। भाकपा (माले) के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने उन्हें याद करते हुए कहा कि राजा बहुगुणा ने न केवल कम्युनिस्टों के बीच, बल्कि सभी जनपक्षधर विचारधाराओं के बीच एकता और समन्वय स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
भट्टाचार्य ने जोर देते हुए कहा कि, “आज जब देश में फासीवादी ताकतों का खतरा बढ़ रहा है, ऐसे में उनका निधन आंदोलनकारी शक्तियों के लिए एक बड़ी क्षति है।” उन्होंने बहुगुणा के विचारों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) के वरिष्ठ नेता काशी सिंह ऐरी ने भी राजा बहुगुणा को याद किया और कहा कि उन्होंने सभी जनवादी ताकतों को एकजुट होने का जो आह्वान किया था, उस पर आज गंभीरता से अमल करना समय की मांग है।
स्मृति सभा में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी बहुगुणा के योगदानों को याद किया। उत्तर प्रदेश से आए कृष्णा अधिकारी ने कहा कि, राजा भाई ने महिलाओं को सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीने के लिए लड़ना सिखाया। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपपा) के केन्द्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने नशा नहीं रोजगार दो और वन आंदोलन के दौरान बहुगुणा के साथ बिताए संघर्ष के दौर को भावुकता के साथ साझा किया।
गौरतलब है कि राजा बहुगुणा का बीते 28 नवंबर को कैंसर के कारण निधन हो गया था। इस स्मृति सभा की अध्यक्षता भाकपा माले के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने की, जबकि संचालन जिला सचिव डा. कैलाश पाण्डेय ने किया। सभा में सीपीआई के राज्य सचिव जगदीश कुलियाल, सीपीआई (एम) के राज्य सचिव राजेन्द्र पुरोहित, जनकवि बल्ली सिंह चीमा और प्रो. उमा भट्ट सहित कई महत्वपूर्ण नेता और कार्यकर्ता उपस्थित थे। यह आयोजन उत्तराखंड की राजनीति में वामपंथी और जनवादी एकता के प्रतीक बहुगुणा को एक सच्ची श्रद्धांजलि थी।

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