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शारदीय नवरात्र: मिलावट से सावधान रहें, कुट्टू का शुद्ध आटा खरीदने के टिप्स

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हल्द्वानी। शारदीय नवरात्रि में व्रत के दौरान कुट्टू और सिंघाड़े के आटे का सेवन आम है। लेकिन बाजार में मिलावटी आटे की भरमार के कारण उपभोक्ता भ्रमित हैं। दून में भी हाल ही में हुई सैंपलिंग में कुछ नमूने फेल हुए हैं, जिसने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
क्यों होती है मिलावट?
नवरात्रि में कुट्टू और सिंघाड़े के आटे की मांग बढ़ने के कारण कुछ दुकानदार इनमें मिलावट करके अधिक मुनाफा कमाने की कोशिश करते हैं। आमतौर पर कुट्टू के आटे में आरारोट, किनकी और काला रंग मिलाया जाता है, जबकि सिंघाड़े के आटे में चावल की भूसी और आरारोट मिलाया जाता है।
कैसे करें शुद्ध आटे की पहचान?
* रंग: शुद्ध कुट्टू का आटा हल्का गहरा भूरा होता है। यदि आटा बहुत हल्का या बहुत गहरा हो तो उसमें मिलावट होने की संभावना है।
* नमी: शुद्ध आटा सूखा होता है। यदि आटे में नमी हो तो समझ जाएं कि वह खराब हो रहा है या उसमें मिलावट की गई है।
* गुंध: शुद्ध आटे में कोई अजीब सी गंध नहीं होती। यदि आटे में कोई अजीब सी गंध आ रही हो तो उसे न खरीदें।
* स्पर्श: शुद्ध आटा महीन और मुलायम होता है। यदि आटा खुरदरा हो तो उसमें मिलावट होने की संभावना है।
* पानी में मिलाकर देखें: एक गिलास पानी में थोड़ा सा आटा डालें। शुद्ध आटा धीरे-धीरे नीचे बैठ जाएगा, जबकि मिलावटी आटा पानी में तैरने लगेगा।
* पैकिंग: हमेशा पैकिंग वाले आटे को ही खरीदें। पैकिंग पर उत्पादन की तारीख और समाप्ति की तारीख देख लें।
* साबुत कुट्टू: यदि संभव हो तो साबुत कुट्टू खरीदकर उसे घर पर ही पिसवा लें। इससे आप पूरी तरह से शुद्ध आटा प्राप्त कर सकते हैं।
खाली पेट न खाएं कुट्टू का आटा
कुट्टू का आटा गर्म होता है। इसे खाली पेट खाने से गैस बन सकती है। इसलिए इसे दही या अन्य ठंडे पदार्थों के साथ मिलाकर ही खाएं।
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी का कहना
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि कुट्टू का आटा पुराना होने पर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए हमेशा ताजा आटा खरीदें और खुले आटे से बचें।

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