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हल्द्वानी अतिक्रमण: बनभूलपुरा मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली, अब 16 दिसंबर को फैसला!

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हल्द्वानी के बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज होने वाली सुनवाई टल गई है। लाखों लोगों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी। जानें क्या है पूरा विवाद।

हल्द्वानी: उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा में रेलवे की भूमि पर कथित अतिक्रमण के मामले में आज (10 दिसंबर, 2025) सुप्रीम कोर्ट में होने वाली महत्वपूर्ण सुनवाई टल गई है। लाखों लोगों के जीवन और आवास से जुड़े इस संवेदनशील मामले में अब अगली सुनवाई 16 दिसंबर को निर्धारित की गई है। इस स्थगन से बनभूलपुरा के निवासियों को फिलहाल थोड़ी राहत मिली है, जो हाईकोर्ट के अतिक्रमण हटाने के आदेश के बाद से चिंता में थे।
क्या है बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण का पूरा मामला?
यह विवाद हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे की लगभग 29 हेक्टेयर जमीन से जुड़ा हुआ है। रेलवे ने बनभूलपुरा की गफूर बस्ती, इंदिरा नगर, नई बस्ती और रेलवे पटरी से सटे इलाकों की इस भूमि पर दावा किया है। रेलवे का कहना है कि यहां रह रही बड़ी आबादी ने अवैध रूप से निर्माण किया है और यह रेलवे की संपत्ति है। स्थानीय निवासियों का तर्क है कि वे लोग इस क्षेत्र में 40 से 50 सालों से रह रहे हैं और उनके पास कई वैध दस्तावेज़ भी हैं।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुँचे लोग
इस पूरे मामले की शुरुआत हल्द्वानी निवासी रविशंकर जोशी की साल 2022 में दाखिल याचिका से हुई थी। नैनीताल हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए रेलवे की भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने के निर्देश जारी किए थे। इस फैसले के बाद, प्रभावित क्षेत्रीय लोगों ने न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लोगों ने अपनी दशकों पुरानी रिहाइश के समर्थन में दलीलें पेश की हैं। निवासियों की उम्मीदें अब पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट के आगामी फैसले पर टिकी हैं।
अब 16 दिसंबर को होगा फैसला, लोगों में बढ़ी बेचैनी
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने के बाद बनभूलपुरा के निवासियों की बेचैनी बढ़ गई है। उनकी नजरें अब 16 दिसंबर की तारीख पर टिकी हैं, जब यह निर्धारित होगा कि उनका भविष्य क्या होगा। सरकार और रेलवे दोनों ही पक्षों की दलीलें कोर्ट के सामने पेश की जाएंगी। स्थानीय प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है। यह मामला देश भर में भूमि विवादों और मानवीय पहलुओं को लेकर एक बड़ी बहस का विषय बन गया है।

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