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नई दिल्ली

वसीयत उनकी

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नहीं हैं मानते जीते जी नसीहत उनकी,

कभी न पूछते कैसी है तबीयत उनकी,

बूढ़े मां-बाप जब दुनिया से चले जाते हैं,

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खोजते हैं कहां रक्खी है वसीयत उनकी।

देवेश द्विवेदी ‘देवेश’

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