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अलीगढ़ के शिक्षक ने पहाड़ को दी अपनी जवानी, विदाई पर रो पड़ा पूरा चमोली
अलीगढ़ के राम कृष्ण शर्मा गुरुजी 27 साल चमोली में सेवा देकर हुए रिटायर। पहाड़ से पलायन के दौर में उन्होंने निभाया अपना फर्ज। भावुक विदाई की पूरी खबर।
चमोली: उत्तराखंड के पहाड़ों से जहां लोग अक्सर सुख-सुविधाओं की तलाश में मैदानों की ओर पलायन करते हैं, वहीं अलीगढ़ के एक शिक्षक ने कर्तव्यनिष्ठा की अनूठी मिसाल पेश की है। शिक्षक राम कृष्ण शर्मा जी ने अपनी जवानी के बहुमूल्य 27 वर्ष चमोली जनपद के दुर्गम क्षेत्रों में बच्चों का भविष्य संवारने में समर्पित कर दिए। वर्ष 1997 में अपनी पहली नियुक्ति चमोली के दूरस्थ बाजबगड़ में लेने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
पहाड़ का जीवन चुनौतियों से भरा था, लेकिन शर्मा जी का संकल्प हिमालय से भी ऊंचा रहा। साल 2000 में जब उत्तराखंड राज्य बना, तब कई सरकारी कर्मचारी वापस उत्तर प्रदेश या मैदानी जिलों में चले गए। उस दौर में राज्य के मूल निवासियों ने भी मैदानी क्षेत्रों का रुख किया, लेकिन अलीगढ़ के इस शिक्षक ने पहाड़ के बच्चों का साथ नहीं छोड़ा। उन्होंने कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बीच अपनी सेवा जारी रखी।
राम कृष्ण शर्मा जी का यह समर्पण उन सभी कर्मियों के लिए एक बड़ी सीख है, जो दुर्गम क्षेत्रों में तैनाती से बचते हैं। उनके छात्रों और ग्रामीणों का कहना है कि गुरुजी ने केवल किताबी ज्ञान ही नहीं दिया, बल्कि जीवन जीने का सलीका भी सिखाया। उनकी निष्ठा का ही परिणाम था कि विदाई समारोह के दौरान हर आंख नम थी। ग्रामीणों ने उन्हें अपने परिवार के सदस्य की तरह विदा किया।
जब गुरुजी अपनी सरकारी सेवा पूर्ण कर वापस अपने घर के लिए रवाना हुए, तो पूरा क्षेत्र उन्हें विदा करने उमड़ पड़ा। ढोल-दमाऊ की थाप के बीच भावुक ग्रामीणों और छात्रों ने उनके चरणों में सिर झुकाकर आभार व्यक्त किया। राम कृष्ण शर्मा जी की यह कहानी साबित करती है कि यदि शिक्षक अपने कर्तव्य के प्रति सच्चा हो, तो वह भौगोलिक सीमाओं से ऊपर उठकर लोगों के दिलों में जगह बना सकता है।
