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उत्तराखण्ड

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव: कांग्रेस ने नियुक्त किए विधानसभा प्रभारी, पंचायती राज मंत्री पर उठाए सवाल

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देहरादून। उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियां जोर पकड़ रही हैं। इस कड़ी में प्रदेश कांग्रेस ने वरिष्ठ नेताओं को विधानसभा प्रभारी नियुक्त किया है ताकि चुनावी प्रक्रिया में पार्टी की रणनीति को प्रभावी रूप से लागू किया जा सके।
प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष संगठन सूर्यकांत धस्माना ने बताया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा के निर्देश पर इन नियुक्तियों को अंतिम रूप दिया गया है। पुरोला में घनानंद नौटियाल, यमुनोत्री में बिहारी लाल, गंगोत्री में धनीलाल शाह, बद्रीनाथ में मनोज रावत, थराली में देवीदत्त कुनियाल, कर्णप्रयाग में डॉ. जीत राम, केदारनाथ में सुरेन्द्र सिंह बिष्ट और रुद्रप्रयाग में जगमोहन भंडारी को प्रभारी नियुक्त किया गया है।
इसी तरह घनसाली में विजय गुनसोला, देवप्रयाग में डॉ. प्रताप भंडारी, नरेंद्रनगर में महेन्द्र सिंह नेगी, प्रतापनगर में वीरेन्द्र कंडारी, टिहरी में पूरन सिंह रावत, धनोल्टी में शांतिप्रसाद भट्ट, चकराता में संजय किशोर, विकासनगर में डॉ. प्रदीप जोशी, सहसपुर में जगदीश धीमान, रायपुर में सुनील जायसवाल, मसूरी में हेमा पुरोहित, डोईवाला में सूरत सिंह नेगी, यमकेश्वर में राजेन्द्र शाह, पौड़ी में नवीन जोशी, श्रीनगर में सुरेन्द्र सिंह रावत, चौबट्टाखाल में जयेन्द्र रमोला, लैंसडाउन में सुनील नौटियाल, कोटद्वार में राजपाल खरोला, धारचूला में महेश डसीला, डीडीहाट में मनोज ओझा, पिथौरागढ़ में हरीश पनेरू, गंगोलीहाट में प्रदीप सिंह पाल, कपकोट में सुनील भंडारी, बागेश्वर में खजान चंद्र, द्वाराहाट में कैलाश पंत, सल्ट में महेश आर्य, रानीखेत में बसंत कुमार, सोमेश्वर में प्रशांत भैंसोड़ा, अल्मोड़ा में खुशहाल सिंह अधिकारी, लोहाघाट में सुमित हृदयेश, चंपावत में आदेश सिंह चौहान, लालकुआं में नारायण सिंह बिष्ट, भीमताल में राजेन्द्र बिष्ट और नैनीताल में पुष्कर नयाल को प्रभारी बनाया गया है।
पंचायती राज मंत्री पर कांग्रेस ने साधा निशाना
सूर्यकांत धस्माना ने पंचायती राज मंत्री की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि पंचायती राज अधिनियम की नियमावली सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि सोमवार को हाईकोर्ट ने भी सरकार से यही सवाल किया था कि नियमावली कहाँ है, लेकिन सरकार के जवाब से न्यायालय असंतुष्ट था और चुनाव पर रोक लगानी पड़ी।
धस्माना ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में पंचायती राज मंत्री कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं, जिससे साफ है कि प्रदेश की नौकरशाही ने राजनीतिक नेतृत्व को पंगु बना दिया है।

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