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हल्द्वानी

हल्द्वानी में परम्परागत होली का आगाज 21 दिसंबर से, चार चरणों में सजेगी निर्वाण से श्रृंगार की महफ़िल

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हल्द्वानी की हिमालय संगीत शोध समिति हर साल की तरह इस बार भी परम्परागत होली संगीत का आयोजन करने जा रही है। पौष के पहले रविवार, 21 दिसंबर से होली कार्यशाला शुरू होगी। जानिए बैठक में तय हुई गायन चक्र और चार चरणों की विस्तृत रूपरेखा।

हल्द्वानी। अग्रणीय सांस्कृतिक संस्था हिमालय संगीत शोध समिति इस बार भी अपनी विशिष्ट शैली में परम्परागत होली का आयोजन करने के लिए पूरी तरह तैयार है। संस्था की बैठक में यह तय किया गया है कि इस भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आगाज आगामी 21 दिसंबर को होगा। इसके साथ ही संस्था ने पौष माह के प्रथम रविवार को यानी 21 दिसंबर से ही होली संगीत कार्यशाला भी शुरू करने का निर्णय लिया है।
संस्था अध्यक्ष धीरज उप्रेती की अध्यक्षता में जेके पुरम स्थित संगीत प्रशिक्षण संस्थान में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में आयोजन की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया। बैठक में तय किया गया है कि इस बार होली बैठक में गायन चक्र के अनुसार होली गायन की एक से बढ़कर एक रचनाएं सुनने को मिलेंगी। संस्था के कलाकार अपनी शानदार प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे।
परम्परागत होली के इस आयोजन को चार प्रमुख चरणों में विभाजित किया गया है। इन चरणों में क्रमशः निर्वाण की होली, बसंत की होली, शिव की होली और श्रृंगार की होली की शानदार प्रस्तुति देखने को मिलेगी। ये चरण उत्तराखंड की समृद्ध संगीत और सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाते हैं। बैठक में मौजूद संगीत आचार्य डॉ. पंकज उप्रेती ने इस अवसर पर कहा, “परम्परा के साथ राग हमेशा जोड़ते हैं। ऐसी महफिल ठहराव सिखाती हैं, जिनमें उच्छृंखलता को जगह नहीं है।”
इस बड़े आयोजन के अलावा, हिमालय संगीत शोध समिति के कलाकार लखनऊ और देहरादून सहित देश के अन्य महानगरों में होने वाले विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी होली गायन की प्रस्तुति देंगे। बैठक में ललित मोहन जोशी, नवीन भट्ट, गणेश प्रताप, विजय कुमार उपाध्यक्ष, दिनेश पांडेय, रक्षित पंत, गौरव पाठक, उमेश चन्द्र पाण्डेय आदि कई गणमान्य सदस्य मौजूद रहे।

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