Report by : राम सिंह, अल्मोड़ा
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उपपा ने दिया ‘व्यवस्था परिवर्तन’ का नारा, जुटेंगे क्षेत्रीय दल!

उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (UPPA) के अध्यक्ष पीसी तिवारी ने गैरसैंण से हुंकार भरी। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण का उद्देश्य अधूरा है और वे ग्राम स्तर पर स्वायत्त सरकारें चाहते हैं। उपपा क्षेत्रीय ताकतों को एकजुट करेगी।

अल्मोड़ा। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (UPPA) के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने गैरसैंण दौरे के दौरान राज्य की मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। रामलीला मैदान में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को बने 25 साल हो चुके हैं, लेकिन राज्य की हालत आज “बद से बदतर” हो गई है। उनका मानना है कि जिस उद्देश्य और बलिदान की भावना से राज्य का निर्माण हुआ था, वह अवधारणा कहीं भी पूरी होती नज़र नहीं आ रही है।

उपपा ने दिया ‘व्यवस्था परिवर्तन’ का नारा, जुटेंगे क्षेत्रीय दल!


विकेंद्रीकरण और स्वायत्त सरकार का रोडमैप


पीसी तिवारी ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी उत्तराखंड में “व्यवस्था परिवर्तन” चाहती है। इस परिवर्तन के तहत वह ग्राम, क्षेत्र और जिला तीनों स्तरों पर स्वायत्तशासी सरकारें स्थापित करना चाहते हैं। उनका मत है कि निर्णय लेने, उसे लागू करने और उसका श्रेय पाने में आम जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि दिल्ली और विदेशों में बैठे कॉर्पोरेट घरानों के भरोसे उत्तराखंड का भला संभव नहीं है। यही कारण है कि उपपा अब सभी क्षेत्रीय और जनपक्षीय ताकतों को एकजुट करने में जुट गई है।


कॉर्पोरेट साजिश और जनहित के मुद्दे


तिवारी ने पंचायतों और स्थानीय निकायों को कॉर्पोरेट जगत के हाथों सौंपने की “साजिश” पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बिजली के स्मार्ट मीटरों को प्रीपेड मीटर में बदलने की प्रक्रिया को उपभोक्ताओं के लिए विचारणीय विषय बताया। उपपा जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय लोगों के अधिकार के लिए लगातार संघर्षरत है। “नशा नहीं रोज़गार दो” आंदोलन के तहत उनका संघर्ष जारी है, जिस पर उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पर तंज कसते हुए कहा कि अब केवल ‘गहथ भट्ट खाने’ से काम चलने वाला नहीं है, बल्कि ज़मीनी संघर्ष ज़रूरी है।


गैरसैंण: मात्र एक स्थल नहीं, एक ‘अवधारणा’


पीसी तिवारी ने गैरसैंण को मात्र एक भौगोलिक स्थल का नाम मानने से इनकार किया। उन्होंने इसे उत्तराखंड की राजधानी से जुड़ी एक गहरी अवधारणा बताया, जो राज्य की आत्मा का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि कृषि, पशुपालन, रोज़गार, सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा की उत्तम व्यवस्था के लिए उनकी पार्टी के पास एक स्पष्ट रोडमैप तैयार है। इस दौरान महेश फुलारा, लीला धर, चंद्रशेखर, भुवनचंद्र व भैरव असनोड़ा सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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