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हल्द्वानी

हल्द्वानी की भीषण गर्मी में बेजुबानों के लिए मसीहा बना वंदे मातरम् ग्रुप

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हल्द्वानी में भीषण गर्मी के बीच वंदे मातरम् ग्रुप ने बेसहारा पशु-पक्षियों के लिए प्याऊ सेवा अभियान शुरू किया है। स्थानीय लोग भी इस मुहिम में बढ़-चढ़कर सहयोग कर रहे हैं।

हल्द्वानी। इस समय भीषण गर्मी का प्रकोप देखने को मिल रहा है। चिलचिलाती धूप और बढ़ते तापमान के बीच इंसानों के साथ-साथ बेजुबान पशु-पक्षी भी पानी के लिए तरस रहे हैं। इस गंभीर समस्या को देखते हुए शहर के सामाजिक संगठन ‘वंदे मातरम् ग्रुप’ ने एक बेहद सराहनीय कदम उठाया है। संस्था द्वारा बेजुबानों की प्यास बुझाने के लिए एक विशेष प्याऊ सेवा अभियान चलाया जा रहा है।
इस मानवीय अभियान के तहत हल्द्वानी शहर के विभिन्न सार्वजनिक और प्रमुख स्थानों पर पक्षियों एवं बेसहारा पशुओं के लिए पानी के बर्तनों की व्यवस्था की जा रही है। संस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इस झुलसा देने वाली गर्मी में कोई भी बेजुबान प्यासा न रहे। इस नेक काम में वंदे मातरम् ग्रुप के कार्यकर्ताओं को स्थानीय जनता का भी भरपूर और सराहनीय सहयोग मिल रहा है।
अभियान की अनूठी बात यह है कि वंदे मातरम् ग्रुप विभिन्न क्षेत्रों में प्याऊ के बर्तन उपलब्ध करा रहा है, जबकि स्थानीय पशु प्रेमी रोजाना उनमें साफ पानी भरने की जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं। इसके साथ ही संस्था के सदस्य आम लोगों से भी लगातार यह भावुक अपील कर रहे हैं कि वे इस मौसम में अपने घरों की छतों, बालकनी और आसपास बेजुबानों के लिए पानी जरूर रखें।
मुहिम से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि मानवता की सेवा के साथ-साथ इन बेसहारा बेजुबानों की देखभाल करना भी पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। शहर के बुद्धिजीवियों और स्थानीय निवासियों ने इस पहल की जमकर सराहना की है। लोगों का कहना है कि रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के इस मौसम में यह अभियान बेजुबान जीवों की जान बचाने के लिए बेहद जरूरी और समय पर उठाया गया कदम है।
इस पुनीत कार्य को सफल बनाने में संस्था के कई कर्मठ कार्यकर्ता दिन-रात जुटे हुए हैं। प्याऊ सेवा अभियान में मुख्य रूप से शैलेन्द्र सिंह दानू, चंदू मेहता, गौरव पांडे, सुनील सनवाल और उमेश बचखेती आदि लोग पूरी निष्ठा के साथ सेवा कार्य में लगे हुए हैं। यह टीम लगातार शहर के नए इलाकों में पहुंचकर इस अभियान का दायरा बढ़ा रही है ताकि अधिक से अधिक जीवों की प्यास बुझाई जा सके।

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