नई दिल्ली
इंटरनेट पर ‘पिज्जा’ की तरह हो रहा महिलाओं का सौदा: IASC की रिपोर्ट में खौफनाक खुलासा
तकनीक की अंधेरी राहों में महिलाओं और बच्चियों का ऑनलाइन सौदा। IASC की रिपोर्ट ने ‘पिम्पिंग वेबसाइट्स’ के जरिए हो रही आधुनिक गुलामी और मानव तस्करी को बेनकाब किया।
तकनीक की दुनिया ने जहाँ हमें असीमित सुविधाएं दी हैं, वहीं ‘इंडिपेंडेंट एंटी-स्लेवरी कमिश्नर (IASC)’ की हालिया रिपोर्ट ने इसके सबसे डरावने और अंधेरे पक्ष को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, आज के दौर में इंटरनेट पर महिलाओं और मासूम बच्चियों का सौदा ‘पिज्जा’ या किसी सामान्य ‘प्रोडक्ट’ की तरह किया जा रहा है। ‘पिम्पिंग वेबसाइट्स’ के नाम से चर्चित ये प्लेटफॉर्म अब आधुनिक गुलामी का वैश्विक केंद्र बन चुके हैं।
कमिश्नर एलेनोर लियोन की जांच में सामने आया कि ये वेबसाइट्स अपराधियों के लिए ‘सोने की खान’ बन गई हैं। जांच की गई 12 प्रमुख वेबसाइट्स पर करीब 63,000 विज्ञापनों में से 60% सीधे तौर पर मानव तस्करी और यौन शोषण से जुड़े पाए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि मात्र एक महीने के भीतर इन वेबसाइट्स पर 4 करोड़ से अधिक लोग पहुंचे, जो इस अवैध कारोबार की भयावह पहुंच को दर्शाता है।
पीड़िताओं की आपबीती सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। एक पीड़िता ने बताया कि उसने अपने शरीर पर टैटू सिर्फ इसलिए बनवाया ताकि उसकी हत्या होने पर कम से कम उसके शव की शिनाख्त हो सके। इन महिलाओं को बलात्कार और जान से मारने की धमकियां देकर इस दलदल में धकेला जाता है। अपराधी खुद महिलाओं के नाम पर ग्राहकों से चैट करते हैं और सारा मुनाफा बिचौलिए डकार जाते हैं, जबकि महिलाएं बेघर और गहरे सदमे में जीने को मजबूर हैं।
इस रिपोर्ट के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरकारों ने कड़ा रुख अपनाया है। नए कानूनों के तहत अदालतों को इन वेबसाइट्स को तुरंत सस्पेंड करने का अधिकार दिया जा रहा है। टेक कंपनियों को अब किसी भी आपत्तिजनक विज्ञापन को 48 घंटे के भीतर हटाना होगा और उम्र का सत्यापन (Age Verification) अनिवार्य करने की मांग तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सावधानी ही बचाव है; इंटरनेट पर ‘एस्कॉर्ट सर्विस’ जैसे संदिग्ध विज्ञापनों के पीछे अक्सर एक बड़ा संगठित अपराध छिपा होता है।
