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नई दिल्ली

“अविवाहित बेटी को अपनी शादी के लिए पिता से खर्च मांगने का अधिकार”

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पिता की संपत्ति से खर्च वसूलने को दायर केरल हाइकोर्ट की याचिका पर सुनवाई
केरल। केरल उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि किसी भी अविवाहित बेटी का मात्र धार्मिक आधार पर अपने पिता से शादी का खर्च पाने से वंचित नहीं किया जा सकता है। न्यायमूर्ति अनिल के नरेंद्रन और न्यायमूर्ति पीजी अजित कुमार की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की। न्यायालय ने आगे यह भी कहा कि मात्र शादी के खर्च का अधिकार मिलने से ही बेटियों को पिता की संपत्ति की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने का अधिकार नहीं मिल जाता है। इसके लिए उन्हें संपत्ति पर दावा पेश करना चाहिए।
दो बहनों ने याचिका दायर की है। दोनों बहनें अपनी मां के साथ रहती हैं। याचिका कर्ता बहनों का कहना है कि उनके पिता ने उनकी मां के सोने के गहने बेचकर और मां एवं ननिहाल से आर्थिक सहायता लेकर संपत्ति खरीदी। अब वह इस संपत्ति को किसी अन्य व्यक्ति के नाम करना चाहते हैं। दोनों बहनों ने पिता को ऐसा करने से रोकने का आदेश जारी करने के लिए याचिका दायर की है, ताकि जरूरत पड़ने पर इस संपत्ति को कुर्क करके या इसके लाभ से विवाह खर्च वसूला जा सके। उनका तर्क है कि यदि प्रतिवादी संपत्ति को किसी अन्य व्यक्ति के नाम कर देता है तो उनका खर्च प्राप्त करने का अधिकार प्रभावित होगा।
न्यायालय ने उल्लेख किया कि दोनों अविवाहित बहनों को शादी के खर्च पर अधिकार है, लेकिन अपने पिता द्वारा संपत्ति की खरीद-फरोख्त रोकने का उन्हें अधिकार नहीं है। पिता द्वारा संपत्ति की खरीद-फरोख्त से रोकने के लिए उन्हें संपत्ति पर अपना दावा प्रस्तुत करना होगा।

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न्यायालय ने यह भी पाया कि याचिका कर्ताओं ने पहले ही प्रतिवादी की उसी संपत्ति की कुर्की के लिए भी याचिका दायर की है। न्यायालय के अनुसार, उनका इरादा न्यायालय के आदेश के तहत मिलने वाले धन की वसूली नहीं बल्कि अपने पिता को शर्मिंदा करना है।

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