उत्तराखण्ड
टीईटी मामला: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका होगी, ‘महक क्रांति’ योजना को भी मंजूरी
देहरादून। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करने का निर्णय लिया है, जिसमें बेसिक और जूनियर स्तर के शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य किया गया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। बैठक के बाद सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने बताया कि कुल सात प्रस्तावों को मंजूरी मिली। हालांकि टीईटी संबंधी विषय एजेंडे में शामिल नहीं था, लेकिन शिक्षकों के हित को देखते हुए इस पर विस्तार से चर्चा की गई।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से उत्तराखंड के करीब 18 हजार बेसिक शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। ये सभी शिक्षक वर्ष 2011 से पहले नियुक्त हुए थे, जब टीईटी पास करना अनिवार्य नहीं था। शिक्षकों का तर्क है कि नियुक्ति के समय टीईटी की शर्त लागू न होने के कारण अब यह नियम उनके लिए अन्यायपूर्ण है। राज्य सरकार ने इस तर्क को आधार मानते हुए पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का निर्णय लिया।
बैठक में प्रदेश में सगंध पौधों को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड महक क्रांति नीति 2026–2036 को भी मंजूरी दी गई। इस दस वर्षीय योजना का लक्ष्य राज्यभर में 22,750 हेक्टेयर भूमि पर सगंध फसलों की खेती कराना है। प्रथम चरण में 91 हजार किसानों को लाभ देने की तैयारी की गई है। नीति के तहत एक हेक्टेयर तक भूमि पर खेती करने वाले किसानों को 80 प्रतिशत और इससे अधिक भूमि वाले किसानों को 50 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। सभी जिलों के किसान इस योजना से जुड़ सकेंगे।
कैबिनेट के इन फैसलों को राज्य सरकार ने शिक्षा और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। जहां एक ओर यह निर्णय शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने का प्रयास है, वहीं दूसरी ओर महक क्रांति योजना किसानों की आय बढ़ाने और राज्य की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
