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अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़

अल्मोड़ा: ध्वस्त सिंचाई योजना से 1000 खेत सूखे, DM को चेताया, आंदोलन की तैयारी!

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अल्मोड़ा के धौलछीना क्षेत्र में दैवीय आपदा से लिगुड़ता, मंगलता सिंचाई योजना ध्वस्त। 1000 किसानों की रोजी-रोटी संकट में, जिला पंचायत सदस्य शैलजा चम्याल ने जल्द मरम्मत न होने पर धरने की चेतावनी दी। पूरी खबर पढ़ें।

धौलछीना, अल्मोड़ा। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में दैवीय आपदा के कारण ध्वस्त हुई लिगुड़ता, मंगलता सिंचाई योजना की मरम्मत में हो रही देरी को लेकर किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। इस महत्वपूर्ण सिंचाई योजना के टूटने से क्षेत्र के करीब 1000 खेत सूखे की चपेट में हैं, जिससे इस वर्ष की बुवाई और फसल उत्पादन पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। पानी के अभाव में सैकड़ों कृषकों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनकी रोजी-रोटी का संकट गहराने की आशंका है।


प्रमुख समस्या और नुकसान


जिला पंचायत सदस्य सल्लाभाटकोट, शैलजा चम्याल ने इस संबंध में अधिशासी अभियंता, लघु सिंचाई खंड अल्मोड़ा को एक कड़ा पत्र भेजा है। उन्होंने बताया कि डूंगरलेख, मंगलता, लिगुड़ता, पभ्या और जालीखेत जैसे प्रमुख क्षेत्रों में यह पाइपलाइन सिंचाई योजना जगह-जगह से टूट गई है। यह योजना इस पट्टी की उपजाऊ भूमि की जीवनरेखा है, जिससे हर साल कई टन अनाज पैदा होता है। सिंचाई योजना के ध्वस्त होने से किसान समय पर बुवाई नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उन्हें महंगाई के इस दौर में अपनी आजीविका को लेकर अत्यधिक चिंता हो रही है।

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विभाग की धीमी रफ्तार पर सवाल


कृषकों का कहना है कि आपदा को काफी समय बीत चुका है, लेकिन लघु सिंचाई विभाग की ओर से मरम्मत के कार्य में अपेक्षित गति नहीं दिखाई दे रही है। यह स्थिति सीधे तौर पर किसानों के भविष्य को प्रभावित कर रही है। शैलजा चम्याल ने विभाग से पुरजोर आग्रह किया है कि योजना की मरम्मत को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द इसे ठीक करवाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसान समय पर अपनी खेती-बाड़ी का कार्य शुरू नहीं कर पाए और विभाग का यही रवैया रहा, तो वे समस्त जनता को साथ लेकर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।

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रोजी-रोटी पर गहराता संकट


किसानों के लिए समय पर सिंचाई सुविधा मिलना बहुत ज़रूरी है। यह मामला सिर्फ़ पानी का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और कृषकों की खाद्य सुरक्षा से जुड़ा है। ऐसे में, अल्मोड़ा प्रशासन और लघु सिंचाई विभाग को इस गंभीर चेतावनी को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। इस आपदाग्रस्त सिंचाई योजना को ठीक करवाना न केवल विभाग की जिम्मेदारी है, बल्कि यह सैकड़ों परिवारों को आर्थिक संकट से बचाने का एक आवश्यक कदम भी है।

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