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नई दिल्ली

हरिद्वार में श्रीमद्भागवत कथा की धूम: फूलों की होली के साथ मनाया गया नंदोत्सव

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हरिद्वार के ज्वालापुर में अध्यात्म चेतना संघ द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य करुणेश मिश्र ने भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन किया। भजनों पर झूमे श्रद्धालु।

हरिद्वार ज्वालापुर स्थित मोतीमहल मंडपम् में इन दिनों भक्ति की अविरल धारा बह रही है। अध्यात्म चेतना संघ की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत भक्ति यज्ञ के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव यानी ‘नंदोत्सव’ बड़ी धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान कथा मंडप में “बह जाएगी कजरे की धार, ना मो पे रंग डारो” जैसे भजनों के बीच फूलों की होली खेली गई। पूरा वातावरण भगवान कृष्ण के जयकारों और बधाई गीतों से गुंजायमान रहा।
कथा व्यास आचार्य करुणेश मिश्र ने भगवान के प्राकट्य का रहस्य बताते हुए कहा कि ईश्वर का अवतार भक्तों को आनंद प्रदान करने और अधर्म का नाश करने के लिए होता है। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार भगवान श्रीराम ने संतों और ऋषियों के कल्याण के लिए मनुष्य रूप लिया, उसी प्रकार कृष्ण ने भी असुरों के संहार और प्रेम की स्थापना के लिए गोकुल को चुना। भगवान के गोकुल पहुँचने की खुशी में भक्तों ने जमकर नृत्य किया।
कथा के दौरान आचार्य ने कृष्ण की बाल लीलाओं का मनमोहक वर्णन किया। उन्होंने पूतना वध, शकटासुर वध, माखन चोरी और गोपियों के साथ चीर हरण लीलाओं को विस्तार से सुनाया। आचार्य ने बताया कि कैसे नन्हे कान्हा ने माता यशोदा को अपने मुख में ही संपूर्ण ब्रह्मांड के दर्शन करा दिए थे। इन प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए और पूरा पांडाल भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया।
कार्यक्रम का समापन भगवान की दिव्य आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य यजमान प्रभाष कंसल और ममता कंसल सहित योगाचार्य विशाल शर्मा, अशोक सरदार और अध्यात्म चेतना संघ के कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। मीडिया प्रभारी अरुण कुमार पाठक ने बताया कि कथा के माध्यम से समाज में आध्यात्मिक चेतना जगाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु इस ज्ञान गंगा में डुबकी लगा रहे हैं।

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