Connect with us

देहरादून

देहरादून में वसंतोत्सव-2026 का आगाज: राज्यपाल ने किया ‘भोज पत्र’ डाक कवर का विमोचन

Published

on

खबर शेयर करें 👉

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने देहरादून में वसंतोत्सव-2026 का उद्घाटन किया। ‘फ्लोरल हीलिंग’ थीम पर आधारित इस उत्सव में भोज पत्र पर विशेष डाक कवर जारी हुआ। जानें मुख्य आकर्षण।

देहरादून: राजधानी देहरादून के लोक भवन परिसर में शुक्रवार को प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने पुष्पों की भव्य प्रदर्शनी के साथ ‘वसंतोत्सव-2026’ का औपचारिक शुभारंभ किया। इस वर्ष उत्सव की थीम “फ्लोरल हीलिंग: नेचर्स पाथ टू वेल बीइंग” रखी गई है, जो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में प्रकृति की भूमिका को दर्शाती है।
उद्घाटन समारोह के दौरान राज्यपाल ने उत्तराखंड की प्राचीन विरासत “भोज पत्र” पर आधारित एक विशेष डाक आवरण (Postal Cover) का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि भोज पत्र हमारी ज्ञान परंपरा का प्रतीक है और इसे जनसामान्य के बीच लाना गौरव की बात है। कार्यक्रम में कृषि मंत्री गणेश जोशी और पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज भी मौजूद रहे। डाक विभाग द्वारा लगाई गई टिकट प्रदर्शनी ने भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
वसंतोत्सव के पहले दिन योग और खेलों का रोमांचक प्रदर्शन हुआ। राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान और निरामया योगम रिसर्च फाउंडेशन के बच्चों ने रिदमिक योग की शानदार प्रस्तुति दी। वहीं, वुशु एसोसिएशन के नन्हे खिलाड़ियों के हैरतअंगेज करतबों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। राज्यपाल ने पेंटिंग प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे बच्चों का उत्साह बढ़ाया और उनकी रचनात्मकता की सराहना की।
इस वर्ष वसंतोत्सव में 15 विभिन्न श्रेणियों में कुल 2314 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया है। प्रदर्शनी में कट फ्लावर, बोनसाई, शहद और हाइड्रोपोनिक्स जैसी श्रेणियों में कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। इसके अलावा, लोक भवन परिसर में 343 स्टॉल लगाए गए हैं, जहाँ स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों और मिलेट्स पर आधारित व्यंजनों का लोग जमकर लुत्फ उठा रहे हैं।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में ‘अरोमा क्रांति’ पर जोर देते हुए कहा कि उत्तराखंड के सुगंधित उत्पाद वैश्विक स्तर पर पहचान बना सकते हैं। उन्होंने राज्यवासियों से अपील की कि वे परिवार सहित इस पुष्प प्रदर्शनी का आनंद लें। प्रतियोगिताओं के विजेताओं को 1 मार्च, 2026 को पुरस्कृत किया जाएगा। यह आयोजन न केवल बागवानी को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी नए रास्ते खोल रहा है।

Select Language

Advertisement