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उत्तर प्रदेश

मुरादाबाद: बेसिक शिक्षा विभाग की परीक्षा में बड़ी लापरवाही, खुलेआम बंटे प्रश्न पत्र, गोपनीयता भंग

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मुरादाबाद में बेसिक शिक्षा विभाग की वार्षिक परीक्षाओं के पहले ही दिन व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गईं। खुलेआम प्रश्न पत्र बांटने से परीक्षा की शुचिता पर उठे गंभीर सवाल।

मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में बेसिक शिक्षा विभाग की वार्षिक परीक्षाओं के पहले ही दिन अव्यवस्थाओं का बोलबाला रहा। 16 मार्च से शुरू हुई इन परीक्षाओं में विभाग की तैयारियों के दावों की हवा निकल गई। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय के बेहद करीब जिस तरह से प्रश्न पत्रों का वितरण किया गया, उसने परीक्षा की शुचिता और गोपनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


जानकारी के अनुसार, खंड शिक्षा अधिकारी नगर क्षेत्र मुरादाबाद के कार्यालय में सोमवार को खुलेआम प्रश्न पत्रों को गिनकर शिक्षकों को बांटा गया। नियमानुसार परीक्षा से पूर्व प्रश्न पत्रों के पैकेट बंद और गोपनीय होने चाहिए, लेकिन यहाँ खुले तौर पर वितरण होने से पेपर लीक होने या गोपनीयता भंग होने की पूरी संभावना बन गई है। बीएसए विमलेश कुमार के दावों के विपरीत, जिला मुख्यालय से मात्र 100 मीटर की दूरी पर परीक्षा की शुचिता की धज्जियां उड़ती दिखाई दीं।
अव्यवस्था केवल गोपनीयता तक ही सीमित नहीं रही; स्कूलों में प्रश्न पत्रों की भारी कमी भी सामने आई है। केंद्र पर पहुंचे शिक्षकों ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि पंजीकृत बच्चों की संख्या की तुलना में प्रश्न पत्र बहुत कम उपलब्ध कराए गए हैं। शिक्षकों का कहना है कि परीक्षा में बच्चों की उपस्थिति लगभग शत-प्रतिशत रहती है, ऐसे में कम पेपर मिलने से परीक्षा संपन्न कराने में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
यह वार्षिक परीक्षाएं 20 मार्च तक चलनी हैं, लेकिन पहले ही दिन हुई इस फजीहत ने विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मुरादाबाद में बेसिक शिक्षा अधिकारी अक्सर चर्चाओं में रहते हैं, और आज की घटना ने उनके प्रशासनिक नियंत्रण पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जब मुख्य कार्यालय के पास ही नियम ताक पर रखे जा रहे हों, तो दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में परीक्षा की स्थिति क्या होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
फिलहाल, सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर इस लापरवाही को लेकर विभाग की काफी किरकिरी हो रही है। अब देखना यह होगा कि बीएसए विमलेश कुमार इस मामले का संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करते हैं। क्या आगामी दिनों की परीक्षाओं में गोपनीयता और शुचिता का ध्यान रखा जाएगा या इसी तरह ‘आधी-अधूरी’ तैयारियों के बीच बच्चों का भविष्य दांव पर लगा रहेगा, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।

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