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हरिद्वार

हरिद्वार की वंदना शर्मा को संगीत में मिली डॉक्ट्रेट की उपाधि, गढ़वाली लोक संगीत पर किया शोध

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हरिद्वार निवासी संगीत शिक्षिका वंदना शर्मा ने ‘गढ़वाली लोकगीत एवं जागर शैली’ पर शोध कर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। पद्मश्री डॉ. माधुरी बड़थ्वाल के मार्गदर्शन में बढ़ाया मान।

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार के शिवालिक नगर की निवासी और संगीत शिक्षिका वंदना शर्मा ने शिक्षा और संगीत के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। श्रीमती वंदना शर्मा को श्री जगदीशप्रसाद झाबरमल टिबड़ेवाला विश्वविद्यालय, झुंझुनू (राजस्थान) द्वारा ‘डॉक्ट्रेट’ (Ph.D.) की उपाधि से नवाजा गया है। उनके इस शोध का विषय ‘गढ़वाली लोकगीत एवं प्रमुख जागर शैली का विश्लेषणात्मक अध्ययन’ रहा, जो उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
डॉ. वंदना ने अपना यह शोध कार्य मुख्य शोध निर्देशिका डॉ. रंजना सक्सेना (एसोसिएट प्रोफेसर, राजस्थान) और सह-शोध निर्देशिका पद्मश्री डॉ. माधुरी बड़थ्वाल (संस्थापिका, मनु लोक संस्कृत संवर्धन संस्थान, देहरादून) के कुशल मार्गदर्शन में पूर्ण किया। विश्वविद्यालय के ललित कला संकाय की डीन डॉ. अंजू सिंह और रजिस्ट्रार डॉ. अजीत कसवां की उपस्थिति में उन्हें यह प्रतिष्ठित उपाधि प्रदान की गई।
अपनी इस सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए डॉ. वंदना शर्मा ने अपने मार्गदर्शकों, परिजनों और शुभचिंतकों का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने विशेष रूप से अपनी गुरु डॉ. गीतांजलि जोशी (प्राचार्य, महिला महाविद्यालय, सती कुंड, कनखल) के प्रति विशेष कृतज्ञता प्रकट की। डॉ. वंदना ने बताया कि डॉ. गीतांजलि जोशी ने न केवल उन्हें संगीत की बारीकियां सिखाईं, बल्कि उन्हें शोध के लिए प्रेरित कर एक सफल संगीत अध्यापिका के रूप में स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाई।
डॉ. वंदना की इस उपलब्धि से हरिद्वार के शैक्षणिक और सांस्कृतिक हल्कों में खुशी की लहर है। जानकारों का मानना है कि गढ़वाली लोकगीतों और जागर शैली पर किया गया उनका यह शोध आने वाली पीढ़ी के लिए संगीत के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगा। उनकी इस सफलता पर तमाम सामाजिक संस्थाओं और गणमान्य व्यक्तियों ने उन्हें बधाई दी है।

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