उत्तर प्रदेश
मेरठ में अनोखी मिसाल: तलाक के बाद ढोल-नगाड़ों से हुआ बेटी का स्वागत
मेरठ के सेवानिवृत्त जिला जज डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने अपनी बेटी प्रणिता वशिष्ठ के तलाक के बाद घर वापसी पर जश्न मनाया। समाज को दिया सशक्तिकरण का बड़ा संदेश।
मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से समाज की पारंपरिक सोच को झकझोर देने वाली एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है। शास्त्रीनगर निवासी और उत्तराखंड कैडर के सेवानिवृत्त जिला जज डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने अपनी बेटी प्रणिता वशिष्ठ के तलाक होने पर शोक मनाने के बजाय उसे एक उत्सव के रूप में मनाया। 4 अप्रैल 2026 को फैमिली कोर्ट से कानूनी मुहर लगने के बाद, पिता अपनी बेटी को ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ ससम्मान घर वापस लेकर आए।
डॉ. शर्मा का यह कदम उन रूढ़िवादी बेड़ियों पर कड़ा प्रहार है, जहाँ अक्सर बेटियाँ लोक-लाज के डर से हिंसक रिश्तों में घुटती रहती हैं। प्रणिता की शादी साल 2018 में एक आर्मी मेजर से हुई थी, लेकिन जल्द ही उन्हें शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। डॉ. शर्मा ने स्पष्ट संदेश दिया कि उनकी बेटी कोई ‘सामान’ नहीं है जिसे कहीं भी छोड़ दिया जाए; उसका आत्मसम्मान और सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने ससुराल पक्ष से कोई धन-दौलत या एलिमनी नहीं मांगी, बल्कि सिर्फ अपनी बेटी की गरिमा को चुना।
घर वापसी के इस मौके पर पूरा परिवार “I Love My Daughter” लिखी टी-शर्ट पहने नजर आया। प्रणिता वशिष्ठ स्वयं भी उच्च शिक्षित हैं; उन्होंने मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है और वर्तमान में ‘प्रणव वशिष्ठ ज्यूडिशियल अकादमी’ में फाइनेंस डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। यह अकादमी उनके स्वर्गीय भाई (सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता) की स्मृति में स्थापित की गई है, जो न्याय और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।
सोशल मीडिया और स्थानीय संगठनों द्वारा डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा के इस साहसी निर्णय की जमकर सराहना की जा रही है। समाजविदों का मानना है कि जब माता-पिता अपनी बेटियों के पीछे ढाल बनकर खड़े होते हैं, तभी समाज में वास्तविक नारी सशक्तिकरण आता है। यह घटना संदेश देती है कि गलत रिश्ते से बाहर निकलना कमजोरी नहीं, बल्कि एक नए और सम्मानित जीवन की शुरुआत है।
