हल्द्वानी
हल्द्वानी में बड़ा एक्शन: बिना फायर NOC चल रहे 5 नामी कोचिंग सेंटर सील, मचा हड़कंप
हल्द्वानी में नियमों का उल्लंघन करने वाले 5 बड़े कोचिंग संस्थानों को प्रशासन ने सील कर दिया है। बेसमेंट और बिना फायर एनओसी के चल रहे थे ये सेंटर।
हल्द्वानी। शहर से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आ रही है। नियमों का उल्लंघन कर और छात्रों की सुरक्षा को ताक पर रखकर संचालित हो रहे कोचिंग सेंटरों के खिलाफ प्रशासन ने एक बार फिर बड़ा एक्शन लिया है। शनिवार शाम को जिला प्राधिकरण, राजस्व और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीम ने शहर के कई संस्थानों पर अचानक छापेमारी की। इस औचक कार्रवाई के दौरान सुरक्षा मानकों में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर टीम ने तत्काल पांच प्रमुख कोचिंग सेंटरों को सील कर दिया।
प्रशासनिक टीम का नेतृत्व जिला प्राधिकरण सचिव मनीष कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट एपी बाजपेई और अग्निशमन अधिकारी मिंदर पाल सिंह कर रहे थे। जांच के दौरान पाया गया कि इन सभी संस्थानों में आग से बचाव के उपकरण तो लगे थे, लेकिन किसी के पास भी अनिवार्य फायर एनओसी (अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र) मौजूद नहीं था। इतना ही नहीं, कुछ सेंटरों में आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कोई एग्जिट (निकासी द्वार) मार्ग तक नहीं बनाया गया था। सील किए गए संस्थानों में विजन फ्यूचर-1, विजन फ्यूचर-2, कुमाऊ डिफेंस, नींव द फाउंडेशन और कृष्णा आईएएस शामिल हैं।
इस अचानक हुई कार्रवाई के दौरान पनचक्की रोड पर एक कोचिंग संचालक और सिटी मजिस्ट्रेट के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। संचालक ने अचानक की गई इस सीलिंग की प्रक्रिया और उसके नियमों पर सवाल उठाए, जिससे अधिकारी कुछ देर के लिए असहज हो गए। वहीं दूसरी ओर, शाम के व्यस्त समय में घनी आबादी वाले इलाके में प्रशासनिक गाड़ियों के खड़े होने के कारण सड़कों पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया, जिससे स्थानीय जनता को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
इस कार्रवाई के बाद शहर के जागरूक नागरिकों ने कोचिंग संस्थानों के मासिक सुरक्षा ऑडिट की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि अगर विभाग हर महीने नियमित रूप से चेकिंग करे, तो हादसों को वक्त रहते रोका जा सकता है। इसी बीच ‘एक समाज श्रेष्ठ समाज’ संस्था ने सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन भी भेजा है। इस ज्ञापन में देश भर में बेसमेंट या दूसरी मंजिल से अधिक ऊंचाई पर कोचिंग सेंटरों के संचालन को पूरी तरह प्रतिबंधित करने की मांग की गई है।
