Report by : CWN Desk
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बागेश्वर में बड़ी साइबर ठगी: पूर्व ग्राम प्रधान से 30 लाख रुपये की ठगी, जानें कैसे हुआ खेल

उत्तराखंड के बागेश्वर में ठगों ने खुद को पंचायत राज अधिकारी बताकर पूर्व ग्राम प्रधान से 30 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

बागेश्वर: उत्तराखंड के बागेश्वर जिले से ऑनलाइन धोखाधड़ी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कांडा थाना क्षेत्र के महरूड़ी गांव के एक पूर्व ग्राम प्रधान को साइबर ठगों ने अपनी ठगी का शिकार बनाया है। शातिर ठग ने खुद को उत्तराखंड का वरिष्ठ पंचायत राज अधिकारी बताकर इस पूरी वारदात को अंजाम दिया। पीड़ित को सरकारी योजनाओं के तहत बड़ी रकम मिलने का लालच दिया गया था। इस झांसे में आकर पीड़ित ने अपने जीवन भर की जमा पूंजी गंवा दी।
पुलिस को मिली शिकायत के मुताबिक, महरूड़ी निवासी पूर्व ग्राम प्रधान खुशाल सिंह के पास कुछ दिनों पहले एक अज्ञात फोन आया था। फोन करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम कुलदीप बताया और खुद को सरकारी अधिकारी घोषित किया। उसने दावा किया कि सरकार पूर्व ग्राम प्रधानों को पुराना वेतनमान, पेंशन, दुर्घटना बीमा और एरियर का लाभ दे रही है। इस कागजी प्रक्रिया को शुरू करने के नाम पर ठग ने पहली बार में ही लाखों रुपये सरकारी खाते में जमा करने को कहा।
ठग के बुने जाल में फंसकर पीड़ित ने शुरुआत में दो लाख 69 हजार रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर कर दी। इसके बाद शातिर अपराधी ने हाईकोर्ट से एनओसी, आरबीआई में नया खाता खोलने और हैदराबाद में फिक्स डिपॉजिट कराने के बहाने बनाए। टैक्स बचाने और फाइल रिन्यूवल के नाम पर आरोपी ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल 30 लाख 50 हजार रुपये जमा करवा लिए। हद तो तब हो गई जब आरोपी ने पीड़ित से उनके एटीएम का पिन और बैंक की गोपनीय जानकारियां भी हासिल कर लीं।
काफी समय बीतने के बाद भी जब कोई सरकारी लाभ नहीं मिला, तो पूर्व प्रधान ने दोबारा उस नंबर पर संपर्क साधा। इस बार आरोपी ने उनकी पत्नी की फाइल लंबित होने का बहाना बनाकर और पैसों की मांग की। तब जाकर पीड़ित को अपने साथ हुई इस बड़ी ठगी का अहसास हुआ। कांडा पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी ने बताया कि साइबर सेल की मदद से मामले की बारीकी से जांच की जा रही है।

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