Connect with us

नई दिल्ली

देकर एक दूजे का साथ

Published

on

खबर शेयर करें 👉

अधर्म का धर्म पर जहाँ में,हो रहा अब राज।
क्यों नहीं उठकर करें यहाँ, लोग अधर्म विनाश।

एक अकेला खड़ा हुआ है,देता सच का साथ।
सच की डोर को थामों तुम भी,बढा अपना हाँथ।

युगों युगों से चल रहा है,जग में झूठ का राज।
उठकर हमें अब करना है, झूठ का सर्वनाश।

यह भी पढ़ें 👉  ऋषिकेश में होटल में दोस्त की मंगेतर के साथ जबरदस्ती का प्रयास, आरोपी गिरफ्तार

पापी जितने हैं यहाँ, खुद को साधु दिखलायें।
ओढ़ सज्जनता की चादर,वो पाप ही करते जायें।

मानवता अब बची कहाँ,लोग निवाला दूजे का छीनें।
भरने अपनी झोली को,खुशियाँ दूजे की वो छीनें।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड कांग्रेस में महासंग्राम: हरीश धामी ने समर्थकों से माँगा सामूहिक इस्तीफा

अब सब आओ साथ में, लिये हाँथ तुम मशाल ।
पाप को सारे जलाकर, खुशियों को कर दें बहाल।

डॉ. कल्पना कुशवाहा ‘ सुभाषिनी ‘

Select Language

Advertisement