Report by : CWN Desk
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उत्तरकाशी में देव डोली पर विवाद: दलित समाज को रोकने पर हंगामा, धर्म परिवर्तन की चेतावनी

उत्तरकाशी के भराण गांव में गंगा दशहरे पर सोमेश्वर देवता की डोली यात्रा में दलितों को शामिल न करने पर विवाद। पीड़ित पक्ष ने अदालत जाने और धर्म बदलने की चेतावनी दी।

उत्तरकाशी: उत्तराखंड के सीमांत जिले उत्तरकाशी से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहाँ के भराण गांव में गंगा दशहरे के पावन अवसर पर सोमेश्वर देवता की देव डोली यात्रा में दलित समाज को शामिल न करने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस कथित भेदभाव से आक्रोशित दलित समाज के लोग सोमवार देर शाम कानूनी मदद और इंसाफ की गुहार लगाने के लिए उत्तरकाशी जिला मुख्यालय पहुंचे। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में सामाजिक तनाव और चर्चाओं का माहौल बना हुआ है।
पवित्र गंगा दशहरा के मौके पर भराण गांव के आराध्य देव सोमेश्वर देवता की डोली को पारंपरिक रूप से गंगोत्री धाम ले जाने की पुरानी परंपरा रही है। इस धार्मिक अनुष्ठान में हमेशा से गांव के सभी वर्गों की बराबर भागीदारी रहती आई है। इस साल भी यात्रा के भव्य आयोजन के लिए गांव के हर परिवार से चार सौ रुपये की सहयोग राशि जुटाई जा रही थी। विवाद तब शुरू हुआ जब दलित समाज के लोग अपनी तय सहयोग राशि देने और यात्रा में शामिल होने पहुंचे।
पीड़ित ग्रामीणों का आरोप है कि जब वे चंदा देने गए, तो समाज के कुछ दबंग लोगों ने इस पर कड़ी आपत्ति जता दी। विरोध करने वाले लोगों ने साफ तौर पर कह दिया कि दलित वर्ग के लोग उनके साथ मुख्य यात्रा में नहीं आ सकते हैं। इसके साथ ही उन्हें अपनी देव डोली अलग से ले जाने का फरमान भी सुना दिया गया। इस सामाजिक भेदभाव और अपमान से आहत होकर दलित वर्ग के लोग सीधे उत्तरकाशी न्यायालय परिसर पहुंच गए और वकीलों से इस मामले में याचिका दायर करने की मांग करने लगे।
अदालत परिसर में हंगामा बढ़ता देख बार एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्यों ने बीच-बचाव किया। वकीलों ने पीड़ित ग्रामीणों को समझा-बुझाकर और मामले में सम्मानजनक समझौते का पूरा आश्वासन देकर फिलहाल घर वापस लौटाया। हालांकि, पीड़ित समाज के लोगों ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि उनके साथ ऐसा ही भेदभाव जारी रहा, तो वे सामूहिक रूप से धर्म परिवर्तन करने के साथ-साथ अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होंगे।
इस पूरे मामले पर मातली क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य हीरा लाल ने भी अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि किसी भी सार्वजनिक या धार्मिक कार्यक्रम में इस तरह का जातिगत भेदभाव बिल्कुल नहीं होना चाहिए। इससे पहले देव डोली के साथ यमुनोत्री, गंगोत्री और डोडीताल में सभी ग्रामीण मिलकर जाते थे, लेकिन इतिहास में पहली बार ऐसा विवाद सामने आया है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि प्रशासनिक और स्थानीय स्तर पर वार्ता के बाद फिलहाल सभी पक्षों को शांत करा लिया गया है।

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