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उत्तराखण्ड

आज से भगवान बदरीविशाल के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुले, 15 क्विंटल फूलों से मंदिर सजाया

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चमोली। आज सुबह छह बजे भगवान बदरीविशाल के कपाट श्रद्धालुओं के लिए छह माह (ग्रीष्मकाल) के लिए खुल गए। यात्रा पड़ावों से लेकर धाम में तीर्थयात्रियों की खूब भीड़ उमड़ गई है।
केदारनाथ के दर्शन के बाद अधिकांश तीर्थयात्री बदरीनाथ पहुंच रहे हैं। रविवार को बदरीनाथ में अखंड ज्योति के दर्शन के लिए करीब 20,000 तीर्थयात्रियों के पहुंचने की उम्मीद है। उत्तराखंड के चारधामों की यात्रा उत्तरकाशी जिले में स्थित यमुनोत्री धाम से शुरू होती है, जो गंगोत्री और केदारनाथ होते हुए बदरीनाथ धाम पहुंचती है। यमुनोत्री, गंगोत्री और केदारनाथ मंदिर के कपाट 10 मई को खोल दिए गए हैं।
अब रविवार को बदरीनाथ धाम के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खुल गए हैं। इसके बाद पूरी चारधाम यात्रा शुरू हो गई। बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने बताया धाम को ऑर्किड और गेंदे के 15 क्विंटल फूलों से सजाया गया है।
धाम में स्थित प्राचीन मठ-मंदिर भी सजाए गए हैं। जिला प्रशासन ने इस बार बदरीनाथ धाम को पॉलिथिन मुक्त रखने का निर्णय लिया गया है। धाम और पड़ावों में होटल और अन्य व्यावसायियों को पॉलिथीन का उपयोग न करने की सख्त हिदायत दी गई है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अध्यक्ष अजेंद्र अजय एवं उपाध्यक्ष किशोर पंवार सहित मुख्य कार्याधिकारी योगेंद्र सिंह ने भी यात्रा तैयारियों का जायजा लिया।
बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया, सुबह पांच बजे से पूजन और कपाट खुलने की प्रक्रिया शुरू हुई। ठीक छह बजे मंदिर गर्भगृह के द्वार खोले गए। मां लक्ष्मी गर्भगृह से मंदिर की परिक्रमा कर धाम में स्थित अपने मंदिर में विराजमान हो गए। 
कपाट खुलने से पहले ये परंपराएं होंगी पूरी
• प्रात: चार बजे- बदरीविशाल के दक्षिण द्वार से भगवान कुबेर का प्रवेश।
• प्रात: पांच से साढ़े पांच बजे- विशिष्ट व्यक्तियों का गेट नंबर तीन से मंदिर में प्रवेश।
• प्रात: 5.40 बजे- रावलजी, धर्माधिकारी व वेदपाठियों का उद्धवजी के साथ मंदिर में प्रवेश।
• प्रात: 5.45 बजे – रावल और धर्माधिकारी द्वार पूजन।
• प्रात: 6 बजे- श्रद्धालुओं के लिए बदरीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे।
• पूर्वाह्न 11 बजे से गर्भगृह में भगवान बदरीनाथ की नियमित पूजाएं शुरू होंगी।

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