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हल्द्वानी रैकेट: फर्जी निवास प्रमाण पत्र मामले में SIT जाँच का दायरा बढ़ा, ऊधम सिंह नगर तक नेटवर्क!

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हल्द्वानी में फर्जी निवास प्रमाण पत्र रैकेट का तूल पकड़ा। फैजान के नेटवर्क में सरकारी कर्मचारी भी शामिल! ऊधम सिंह नगर में 11 हजार से अधिक फर्जी आवेदन खारिज।

हल्द्वानी। बनभूलपुरा क्षेत्र में फर्जी स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनाने वाले रैकेट का भंडाफोड़ होते ही, इस मामले ने पूरे उत्तराखंड में तूल पकड़ लिया है। कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत द्वारा पर्दाफाश किए गए इस घोटाले की जाँच अब पुलिस ने एसआईटी (SIT) को सौंप दी है, जिसका दायरा ऊधम सिंह नगर जिले तक भी बढ़ाया जा रहा है। पुलिस जाँच में सामने आया है कि इस रैकेट का मुख्य सरगना फैजान था, जो खुद तहसील में अधिकृत अरायजनवीस (याचिका लेखक) भी नहीं था।
पुलिस के अनुसार, फैजान फर्जी आधार कार्ड और यूपीसीएल के डाटा एंट्री ऑपरेटर की मदद से पुराने बिजली के बिलों का इस्तेमाल कर ‘अपणि सरकार पोर्टल’ पर बाहरी लोगों के निवास प्रमाण पत्र बनवाता था। एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी ने बताया कि फैजान लंबे समय से यह काम कर रहा था। पुलिस अब फैजान के डिजिटल साक्ष्य खंगाल रही है और उन सभी लोगों की पहचान कर रही है जिन्होंने फर्जी प्रमाण पत्र बनवाए। राजस्व विभाग को भी फर्जी बिजली-पानी बिलों की जाँच के लिए पत्र लिखा गया है।
इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ट्वीट कर सरकार द्वारा किए जा रहे सत्यापन और जाँच के फैसले का समर्थन किया है। साथ ही, उन्होंने इस जाँच की सीमा को और बढ़ाने की सिफारिश की है, ताकि रैकेट की जड़ तक पहुँचा जा सके। उनका यह समर्थन इस गंभीर मामले पर राजनीतिक सहमति को दर्शाता है। यह भी माना जा रहा है कि फैजान के इस रैकेट में सरकारी विभागों के कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं।
यह मामला तब और गंभीर हो जाता है जब ऊधम सिंह नगर जिले की जनसांख्यिकीय रिपोर्ट सामने आती है। मई 2025 से 18 नवंबर 2025 तक इस जिले में 46,530 स्थायी निवास के आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 11,291 आवेदन फर्जी दस्तावेजों के कारण सीधे तौर पर रिजेक्ट किए गए। यह आँकड़ा जनसांख्यिकीय बदलाव की तेज गति और फर्जीवाड़े के बड़े पैमाने को दिखाता है। प्रशासन ने सभी एसडीएम और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी करने से पहले मूल दस्तावेजों की गहराई से जाँच की जाए।

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