Report by : दानसिंह लोधियाल
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धारी–ओखलकांडा सहित उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष गंभीर, क्षेत्र को ‘आपदा’ घोषित करने की मांग


धानाचूली।
नैनीताल जिले के धारी एवं ओखलकांडा ब्लॉक सहित प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर पर्यावरण प्रेमी चंदन सिंह नयाल व स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। इस संबंध में धारी,ओखलकांडा क्षेत्र के ग्रामीणों की ओर से मुख्यमंत्री, वन मंत्री एवं जिलाधिकारी नैनीताल को ज्ञापन भेजकर पूरे क्षेत्र को आपदा घोषित करने और नागरिकों की सुरक्षा के लिए तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की गई है।
चंदन नयाल ने उपजिलाधिकारी धारी अंशुल भट्ट को सौपे ज्ञापन में कहा कि क्षेत्र में गुलदार सहित अन्य हिंसक वन्यजीवों के हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे ग्रामीणों का सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। महिलाएं और बच्चे भय के कारण घरों में कैद होने को मजबूर हैं, वहीं खेतों में काम करना और पशुपालन भी जोखिम भरा हो गया है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि आदतन हमलावर गुलदार की पहचान कर उसे शीघ्र पकड़ने अथवा नियमों के तहत निर्णायक कार्रवाई की जाए। इसके लिए प्रशिक्षित वन कर्मियों, विशेषज्ञ शिकारियों और ट्रैंकुलाइजेशन टीम की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
ज्ञापन में मानव-वन्यजीव संघर्ष को राज्य आपदा घोषित करने की भी मांग की गई है, जिससे पुलिस, वन, राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग मिलकर संयुक्त रणनीति के तहत काम कर सकें। ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान हालात किसी एक विभाग के बूते संभालना संभव नहीं है।
इसके अलावा जंगलों में आग लगने की घटनाओं पर भी चिंता जताई गई है। ग्रामीणों ने कहा कि आग से वन संपदा, जैव विविधता और छोटे वन्यजीवों को भारी नुकसान हो रहा है, जिस पर सख्त नियंत्रण और वैकल्पिक सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।
ग्रामीणों ने महिलाओं-बच्चों की सुरक्षा के लिए गांवों में नियमित गश्त, संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी निगरानी, पशुओं के लिए सुरक्षित बाड़ व चारा व्यवस्था, वन्यजीव हमलों में मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता एवं एक सदस्य को रोजगार देने की मांग भी की है। साथ ही गांव-गांव सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने पर जोर दिया गया है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि ज्ञापन देने के पांच दिनों के भीतर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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