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उत्तराखण्ड

हरीश रावत की ‘काफल पार्टी’ से सियासत गरम, भाजपा पर साधा निशाना – कहा, “सरकार को कच्ची शराब बेचने से फुर्सत नहीं”

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देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की ‘काफल पार्टी’ एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र बन गई। रविवार को देहरादून के कारगी चौक स्थित एक वेडिंग प्वाइंट में आयोजित इस आयोजन में पहाड़ी उत्पादों के स्वाद के साथ तीखी सियासत भी देखने को मिली। खट्टे-मीठे काफल की दावत के बहाने हरीश रावत ने भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की अपनी पुरानी मुहिम को दोहराया।

हरीश रावत ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में पहाड़ी उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में कई प्रयास किए, लेकिन भाजपा सरकार ने आते ही इन योजनाओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “भाजपा सरकार को ट्रेटा पैक में कच्ची शराब बेचने से फुर्सत नहीं है, उसे पहाड़ और उसके उत्पादों से कोई सरोकार नहीं।”

कार्यक्रम को ‘वोकल फॉर लोकल’ और पलायन रोकने के संदर्भ से जोड़ते हुए रावत ने कहा कि जब उन्होंने 2014 में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की शुरुआत की थी, तब भाजपा नेताओं ने उसका मजाक उड़ाया था। लेकिन आज वही लोग ‘वोकल फॉर लोकल’ के नारे को दोहराते नहीं थकते, जबकि हकीकत में जमीन पर कुछ नहीं किया जा रहा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि “वोकल फॉर लोकल केवल नारा नहीं, बल्कि पलायन रोकने का मजबूत हथियार है, जिसे ईमानदारी से लागू करना होगा।”

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सेना के नाम पर राजनीति का आरोप
हरीश रावत ने भाजपा सरकार पर सैनिकों के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा, “हम सैनिकों के सम्मान में ऐसे पलों को जीते हैं, जबकि वे (भाजपा) सेना का इस्तेमाल अपनी राजनीति चमकाने के लिए करते हैं।” उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता को इस आयोजन से जोड़ते हुए कहा कि यह पर्व सैनिकों के सम्मान को समर्पित है।

दलों से परे, लोगों का समर्थन
काफल पार्टी में कांग्रेस के अलावा अन्य दलों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। सत्ताधारी दल को छोड़कर बड़ी संख्या में राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता इस आयोजन में पहुंचे। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कार्यक्रम में कहा, “जो काम सरकार को करने चाहिए, वह आज विपक्ष कर रहा है। जब तक स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए ठोस नीति नहीं बनेगी, तब तक पलायन जैसी समस्याओं का समाधान संभव नहीं है।”

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छोटे काफल की बड़ी भीड़
कार्यक्रम में लोगों का उत्साह देखने लायक था। देहरादून शहर के अलावा हरिद्वार, रुड़की, ऋषिकेश, विकासनगर और गढ़वाल के कई इलाकों से लोग कार्यक्रम में पहुंचे। कार्यक्रम में पूर्व अध्यक्ष प्रीतम सिंह, ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट, शूरवीर सिंह सजवाण, पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, मनोज रावत, सूर्यकांत धस्माना, वीरेंद्र रावत, अभिनव थापर, नवीन जोशी, परणीती बड़ोनी, लालचंद शर्मा, डॉ. एसएच सचान सहित कई अन्य गणमान्य मौजूद रहे। मंच का संचालन गरिमा दसौनी ने किया।

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