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नैनीताल

वन विभाग में बड़ी कार्रवाई: पेड़ों की अवैध कटान और खनन में लिप्त सात वनकर्मी इधर-से-उधर, एक निलंबित

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रामनगर।। तराई पश्चिम वन प्रभाग में पेड़ों की अवैध कटाई और खनन में लिप्तता के गंभीर आरोपों पर विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए सात वनकर्मियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। रामनगर रेंज के चार दरोगाओं समेत कुल छह अधिकारियों को उनके वर्तमान तैनाती स्थल से हटाकर अन्य स्थानों पर भेजा गया है, जबकि एक वन बीट अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

तराई पश्चिम वन प्रभाग के एसडीओ मनीष जोशी ने शुक्रवार को जानकारी दी कि बीते दिनों रामनगर रेंज क्षेत्र में पांच पेड़ों को अवैध रूप से काट दिया गया था। यद्यपि उनके गिल्टों को बरामद कर लिया गया, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की गई। जांच में लापरवाही और संलिप्तता सामने आने पर कार्रवाई तय की गई।

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एसडीओ ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर रामनगर रेंज के वन दरोगा मोहम्मद इमरान को प्रधान कार्यालय, मोहन चंद्र बिष्ट को जुड़का अनुभाग, जगदीश चंद्र चौबे को दक्षिणी जसपुर तथा चंद्र दत्त पांडे को आमपोखरा स्थानांतरित किया गया है। साथ ही, वन दरोगा नवीन चंद्र को गुलजारपुर से हटाकर जसपुर भेजा गया है, जबकि गुरदेव सिंह को गुलजारपुर पश्चिम में संबद्ध किया गया है।

सबसे बड़ी कार्रवाई वन बीट अधिकारी संदीप कुमार पर की गई है, जिसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। 8 अप्रैल को संदीप कुमार जुड़का मुख्यालय में निरीक्षण के दौरान गैरहाजिर पाए गए थे। इसके बाद 14 अप्रैल को की गई छापेमारी में गुर्जर बस्ती में तस्करी के लिए छिपाकर रखे गए सागौन के 18 गिल्टे बरामद हुए। पूछताछ में ग्रामीणों ने बताया कि ये गिल्टे वन बीट अधिकारी ने खुद वहां छिपाए थे।

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कुमाऊं के मुख्य वन संरक्षक डॉ. धीरज पांडे ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी जांच के आदेश दे दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी की रडार पर और भी कई वनकर्मी हैं, जिन पर जल्द ही कार्रवाई हो सकती है। डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्य ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी कर्मचारी की तस्करों से सांठगांठ पाई गई तो उस पर कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

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