उत्तर प्रदेश
मुरादाबाद में मिड डे मील घोटाला: ब्लैकलिस्टेड संस्था को वर्षों से मिल रहा था संरक्षण
मुरादाबाद में मिड डे मील वितरण में बड़ी धांधली आई सामने। जांच में खुलासा हुआ कि ब्लैकलिस्टेड NGO को दिया गया काम।
मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में बेसिक शिक्षा विभाग एक बार फिर अपनी विवादित कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में है। ताजा मामला नगरीय क्षेत्रों में मिड डे मील (MDM) की आपूर्ति करने वाले एनजीओ के चयन से जुड़ा है। आयुक्त मुरादाबाद मंडल के स्तर से की जा रही जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जिस एनजीओ को वर्षों से जिम्मेदारी दी गई थी, वह पहले से ही ब्लैकलिस्टेड है।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस संस्था के खिलाफ राशन की कालाबाजारी को लेकर मुकदमा भी दर्ज है। बावजूद इसके, विभाग के अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर इस एनजीओ को काम दिया। इतना ही नहीं, विभाग द्वारा लगातार इसकी कमियों पर पर्दा डालने की कोशिश भी की गई। अब जांच की आंच बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) विमलेश कुमार और मिड डे मील समन्वयक अखिलेश सागर तक पहुंच गई है। मंडल आयुक्त की इस कड़ी जांच से विभाग के भीतर हड़कंप मचा हुआ है।
इस खुलासे के बाद स्थानीय प्रशासन और शिक्षा जगत में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लोगों का कहना है कि बच्चों के निवाले पर डाका डालने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्यवाही होनी चाहिए। फिलहाल, जांच रिपोर्ट के आधार पर बड़े प्रशासनिक एक्शन की तैयारी की जा रही है, जिससे भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ना तय है।
